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Showing posts from March, 2020

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भारत का चुनावी ढांचा: SIR विवाद, EVM बनाम बैलेट पेपर और बायोमेट्रिक-आधारित पारदर्शी समाधान

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## 1. मुख्य बिंदु और पृष्ठभूमि (Executive Summary) * **SIR की पृष्ठभूमि:** भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग द्वारा 'विशेष सघन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) अभियान चलाया गया। * **विवाद की वजह:** इस अभियान के तहत मतदाता सूचियों के गहन सत्यापन के लिए नागरिकों से वर्ष 2002-2004 तक के पुराने दस्तावेज़ मांगे गए और बड़े पैमाने पर नोटिस जारी किए गए। * **जनता की समस्या:** बाढ़, दंगे, पलायन, अनपढ़ता और पुराने वोटर कार्डों में मौजूद स्पेलिंग/उम्र की गलतियों के कारण 20-25 साल पुराने रिकॉर्ड देना आम नागरिकों के लिए अत्यंत कठिन और डरावना साबित हो रहा है। * **मूल प्रश्न:** जब देश में आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, बायोमेट्रिक्स और सर्वव्यापी पहचान डेटाबेस मौजूद हैं, तो कागजी सत्यापन और पुराने रिकॉर्ड्स के झंझट की क्या वास्तव में आवश्यकता है? --- ## 2. वर्तमान SIR प्रणाली की व्यावहारिक समस्याएँ ### क) पुराने दस्तावेज़ों और रिकॉर्ड्स का संकट * **22-25 साल का अंतराल:** 2002 के रिकॉर्ड खंगालना व्यावहारिक नहीं है। बाढ़, आग, प्राकृतिक आप...

कोरोना से मानव को भविष्य के लिए क्या सीखना चाहिए? कोरोना- करुणा अवतार॥

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कोरोना .... देर सबेर चल ही जायेगा. लेकिन इस से मानव को क्या सीखना है? पहली बात.      तुम्हारे बनाये हुए राजनितिक अखाड़े जिन्हे तुम बड़े फख्र से मुल्क कहते हो. वतन कहते हो. बकवास है. और वतनपरस्ती को बहुत ही इज़्ज़त देते हो, राष्ट्रवाद को पूजते हो, बकवास है. देखा तुमने एक नन्हे वायरस ने सारी दुनिया को एक धरातल पर ला पटका. तुम्हें लगता है कि तुम्हारा मुल्क कोई अलग ही दुनिया है तो तुम मूर्ख हो. कभी चादर बिछाई है बेड  पर. एक कोना खींचोगे तो  खिंच जायेगा. ठीक वैसे ही है दुनिया. वायरस चीन में था तो क्या हुआ, पूरी दुनिया हो गयी न आड़ी-टेढ़ी?  तो आज समझने की ज़रुरत है की भारत माता से बड़ी धरती माता है. चीन माता, रूस माता से बड़ी धरती माता है. आज समस्या जो लोकल नज़र आती हैं, वो लोकल नहीं हैं, ग्लोबल हैं. उनके हल भी ग्लोबल ही होने चाहियें. जैसे आज पूरी दुनिया लगी है कोरोना से लड़ने. ठीक वैसे. स्वास्थ्य , शिक्षा, वैज्ञानिकता सारी दुनिया में फैलनी चाहिए, ऐसा नहीं चलेगा कि  कहीं बहुत स्वस्थ, साफ़-सुथरे  लोग हों और कहीं बदबू-गंदगी से बिदबिदाते हुए घर, गलियां, ...