अकबर इलाहाबादी ने कहा है, "पैदा हुआ वकील तो शैतान ने कहा, लो आज हम भी साहिब-ए-औलाद हो गए" न्याय-मशीनरी का अहम पुर्जा है वकील. और वकालत के पेशे में निरी अंधेर-गर्दी है. मैंने भुगती है, देखी है, निपटी है, निपटाई है. वकील कोर्ट को, अपने विरोधी वकील को, अपने मुवक्किल को, अपने नीचे काम करने वाले जूनियर वकीलों का, इंटर्नशिप करने वाले बच्चों तक को फुल्ल-बटा-फुल्ल गुमराह करते हैं. अगर कोई सफ़ल वकील नहीं बनते, जो कि अधिकांश इंटर्न (प्रशिक्षु) नहीं बनते तो उसकी एक बड़ी वजह यह है कि वो बरसों तक सीनियर वकीलों द्वारा गुमराह किये जाते हैं. इंटर्न को लगता है कि वो काम सीख रहे हैं और सीनियर, घिसे वकील काम सिखाने के नाम पर उनसे सिर्फ मजदूरी कराते हैं, बेगार करवाते हैं. स्टाम्प पेपर मंगा लेंगे, ओथ कमिश्नर-नोटरी के पास भेज ठप्पे लगवा लेंगे, सर्टिफाइड कापियों अप्लाई करवा देंगे, काउंटर पर plaint जमा करवा लेंगे-किराया जमा करवा लेंगे, कोर्ट में ऐसी तारीखों पर भेज देंगे जिन पे सिर्फ शक्ल दिखानी होती है या फिर सिर्फ कोई डॉक्यूमेंट सबमिट करने होते हैं, टाइपिंग करवा लेंगे. ये सब काम स...