इक साज़िश है, गरीब गरीब ही रहें गरीब ही रहें, तभी तो कमअक्ल रहेंगे गरीब ही रहें, तभी तो बदशक्ल रहेंगे गरीब ही रहें, तभी तो कमअक्ल रहेंगे गरीब ही रहें, तभी तो बदशक्ल रहेंगे गरीब ही रहें, तभी तो बजायेंगे ताली गरीब ही रहें, तभी तो साफ़ करेंगे नाली गरीब ही रहें, तभी तो बजायेंगे ताली गरीब ही रहें, तभी तो साफ़ करेंगे नाली इक साज़िश है, गरीब गरीब ही रहें गरीब ही रहें तभी तो मटन-चिकन फाड़ा जाएगा, तभी तो फल--काजू-किशमिश-खजूर खाया जाएगा गरीब ही रहें तभी तो मटन-चिकन फाड़ा जाएगा, तभी तो फल--काजू-किशमिश-खजूर खाया जाएगा गरीब ही रहें तभी तो काम वाली बाई को नोचा जाएगा , तभी तो चौक पे बैठा मजूर खाया जाएगा गरीब ही रहें तभी तो काम वाली बाई को नोचा जाएगा , तभी तो चौक पे बैठा मजूर खाया जाएगा इक साज़िश है, गरीब गरीब ही रहें और सब शामिल हैं राजनीति शामिल है देश-नीति शामिल है विदेश-नीति शामिल है सब शामिल हैं इलम शामिल है मजहबी चिलम शामिल है सब शामिल हैं राजनीति शामिल है देश-नीति शामिल है विदेश-नीति शामिल है इलम शामिल है मजहबी चिलम शामिल है सब शामिल हैं इक साज़िश है, गरीब ...