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मेरा यूटूएब चैनल - तुषार कॉस्मिक. My YouTube Channel - Tushar Cosmic

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Tushar   Cosmic     यह मेरा   यूट्यूब  चैनल  है.  नया है...ऑडियंस बनते-बनते बनेगी ..... आप मित्र गण  ही बनाएंगे .... यूट्यूब अपने आप कोई ऑडियंस देता नहीं है ..... खुद से बनानी होती है...... आप मित्रगण ही बना सकते हैं...बन सकते हैं ...वीडियो देखिये.....पूरा देखिये....... मेरा वादा है सीखने को मिलेगा निश्चित ही.                        https://www.youtube.com/@Tushar-Cosmic

हमारी सरकारें किस बेहतरीन(?) ढंग से काम करती हैं: उसका एक नमूना

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दिल्ली की सड़कों की मौजूदा स्थिति और जनता की परेशानियों को उजागर करती यह रिपोर्ट इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि किस तरह बिना सोचे-समझे प्रशासनिक फैसले जनता के लिए सुविधा के बजाय मुसीबत बन जाते हैं। मुख्य बिंदु एवं समस्याएं:  *सड़क की चौड़ाई में कटौती*:    दिल्ली की सड़कों पर पहले से ही वाहनों का भारी दबाव है और चौड़ाई कम पड़ रही है। ऐसे में सड़कों के बीचों-बीच भारी-भरकम सीमेंट के ब्लॉक लगा दिए गए हैं, जिनका निचला बेस एक से डेढ़ फीट चौड़ा है। इससे दोनों तरफ की कुल चौड़ाई लगभग दो से तीन फीट तक कम हो चुकी है, जिससे ट्रैफिक का जाम और अधिक विकट हो गया है। *अवैज्ञानिक और खतरनाक डिजाइन*: ये सीमेंट ब्लॉक्स किसी तय सीक्वेंस या सीधी लाइन में नहीं लगाए गए हैं। सड़क के हल्के उतार-चढ़ाव या घुमाव के साथ ये ब्लॉक बाहर की ओर निकले हुए दिखाई देते हैं, जो विशेषकर रात के समय या तेज रफ्तार में चल रहे दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकते  हैं।   यह जो Mr. डॉक्टर जिंदा जल गए डिवाइडर से कार टकराने के तो ऐसा जरूरी नहीं कि डॉक्टर साहब की ही गलती हो। गलती ...

*पश्चिम विहार की टाउन प्लानिंग: सरकारी 'आला दिमाग' के बेतुके नमूने*

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1. *गजब की ब्लॉक नंबरिंग*: हमारी सरकारें और उनके नुमाइंदे किस कदर घटिया ढंग से काम करते हैं, इसका जीता-जाता सबूत पश्चिम विहार ईस्ट की ब्लॉक नंबरिंग है। पश्चिम विहार की फॉल्टी जोनिंग और अटपटी नंबरिंग के दो स्थानीय उदाहरण 2. A-ब्लॉक की अव्यवस्थित क्रम संख्या:- * पश्चिम विहार में A-1 ब्लॉक से शुरू करने पर इसके साथ लगा हुआ एडजोइनिंग ब्लॉक A-2 आता है, जिसके बाद A-3 होना चाहिए था। * लेकिन इसके उलट, अगला ब्लॉक बीच में फंसा हुआ A-5 है, उसके बाद A-6 आता है, और फिर कहीं जाकर साइड में एडजोइनिंग ब्लॉक A-3 और उसके बाद A-4 आते हैं। 3. आउटर पश्चिम विहार में एलआईजी फ्लैट्स की अजीब नंबरिंग:- * इसकी दूसरी मिसाल आउटर पश्चिम विहार में देखने को मिलती है, जहाँ एलआईजी फ्लैट्स के दो ब्लॉकों को जोड़कर एक कर दिया गया है। * इन दोनों जुड़े हुए ब्लॉकों का संयुक्त नाम 'जीएच फाइव एंड सेवन' (GH 5 & 7) रखा गया है, जबकि 'जीएच सिक्स' (GH 6) इस ब्लॉक से पूरी तरह अलग और बाहर स्थित है। * अगर नंबरिंग का नियम देखा जाए, तो जुड़े हुए हिस्से को 'फाइव एंड सिक्स/ 5 & 6' और अलग वाले को 'सेव...

मेरी कुछ ताज़ा फेसबुक पोस्ट

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  "मेरे बाल" मेरे बालों से बहुत लोगों को बहुत शिकायत रहती है. और यह शिकायत तब और ज्यादा उभर के सामने आती है जब मेरा लेखन या मेरा कथन किसी को बिल्कुल पसंद नहीं आता. और उनकी जमी-जमाई मान्यताओं के बिल्कुल उलट खड़ा होता है। शीर्षासन कर रहा होता है. तो ऐसे में भद्र-जनों को और कुछ नहीं मिलता तो वह सीधा मेरे बालों पर अटैक करते हैं कि यह बाल मेरे सिर पर क्यों है. तो सवाल यह है कि सिर मेरा है, बाल मेरे हैं, मेरे सिर पर है, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, दूसरों को दिक्कत क्यों होती है? कहीं ऐसा तो नहीं कि वह गंजे हैं. सोच कर बताइएगा आप सब लोग, कमेंट कीजिएगा. ~~~~~~~~~~~~~~~ मै वन्दे मातरम गा नहीं सकता, ना भाई, एक अंतरा भी नहीं। जन गण मन भी भूल चुका हूँ, बस कुछ टूटे-फुटे टुकड़े याद हैं। स्कूल के दिनों में गा लेता था जैसे बाकी सब गाते थे। तो क्या हुआ? कसम से, ये भारतीय नेता भी ना, एकदम ओवरस्मार्ट बेवकूफ हैं। फालतू की बातों का बतंगड़ बनाते हैं। देश का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए। इन गानों या anthems को लेकर एक-दूसरे पर इल्जाम लगाते रहते हैं। भला कोई ये कैसे तय कर सकता है कि मैं इस समाज ...

'हिंदू' शब्द और धर्म: एक विवेचना

यह थ्योरी काफी हद तक सही मानी जाती है कि सिंधु दरिया के इर्दगिर्द जो लोग रहते थे बाहर से जो लोग आए उन्होंने उनको हिंदू शब्द से पहचाना और फिर यहां के लोगों ने भी खुद को हिंदू शब्द से पहचानना शुरू कर दिया। अब सवाल यह है कि यह थ्योरी मान लेते हैं ठीक है तो फिर हिंदू कोई धर्म कैसे हुआ? यह तो एक भूभाग पर रहने वाले लोगों को पहचान दी गई उस भूभाग से बाहर के लोगों द्वारा तो यह एक भौगोलिक नाम कहा जा सकता है और "धर्म" का तो इससे कोई लेना देना है नहीं।  लेकिन आज हिंदू शब्द जो है वह कोई भौगोलिक पहचान नहीं है। वह एक खास तरह की मान्यताओं को मानने वाले लोगों को कहा जाता है। यह कहना है कि यह जो तथाकथित हिंदू लोग थे, यह "मानवता" को सर्वोपरि रखते थे,  तो मैं तो इससे कतई सहमत नहीं हूँ। पहली बात तो मैं मानवता के कॉन्सेप्ट से ही सहमत नहीं हूँ। —अगर मानवता में कुत्तियत नहीं है, बिल्लियत नहीं है, उसमें बकरियत नहीं है, उसमें भैंसियत नहीं है—तो मैं तो मानवता को एक बड़ा ही स्वार्थी किस्म का कॉन्सेप्ट मानता हूँ. मानव सिर्फ खुद को ही सेंटर में रख के एक आइडियोलॉजी गढ़ता है, इसलिए उसने एक शब्द ...

भारतीय न्याय व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार

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  तेज़, पारदर्शी और जवाबदेह न्याय की ओर भारत का न्याय तंत्र लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। लेकिन लाखों लंबित मुकदमे, वर्षों तक चलने वाली सुनवाई, बार-बार पड़ने वाली तारीखें, अत्यधिक खर्च, भ्रष्टाचार की आशंकाएँ और जवाबदेही की कमी आम नागरिक के मन में अनेक प्रश्न खड़े करती हैं। आज आवश्यकता केवल छोटे-मोटे सुधारों की नहीं, बल्कि एक ऐसी न्यायिक क्रांति की है जो आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक विधियों, पूर्ण पारदर्शिता और कठोर जवाबदेही पर आधारित हो।  1. जज + जूरी + एआई : न्याय का त्रिस्तरीय मॉडल वर्तमान व्यवस्था में अधिकांश मामलों का निर्णय एक न्यायाधीश द्वारा किया जाता है। इसके स्थान पर एक नया मॉडल विकसित किया जा सकता है जिसमें: - न्यायाधीश कानून की व्याख्या और न्यायिक प्रक्रिया का संचालन करें। - जूरी (सामान्य नागरिकों अथवा विशेषज्ञों का समूह) तथ्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन करे। - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लाखों पुराने निर्णयों, कानूनी धाराओं और उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष विश्लेषण प्रस्तुत करे। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक संतुलित, बहुआयामी और निष्पक्ष बन सकती है। --- 2. अ...