सहन करना, बर्दाश्त करना, tolerate करना ये सब शब्द सहिष्णुता की पोल खोल देते है. आप कब कहते हैं कि मैं सहन कर रहा हूँ, बर्दाश्त करता हूँ, tolerate कर रहा हूँ? जब आपको कुछ ऐसा करना हो जो करना आपकी मर्ज़ी के खिलाफ हो, कुछ ऐसा जो आपको ज़बरदस्ती करना पड़ रहा हो, ऐसा जो आपको पसंद नहीं है, आपको प्रिय नहीं है. कुल मतलब यह है कि एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों के क्रिया कलापों को असल में तो नापंसद करते हैं, फिर भी जैसे-तैसे बर्दाश्त करते हैं. यह कैसी दुनिया है? हम क्यों ऐसी जीवन शैली नहीं घड़ पा रहे कि जिसमें एक दूजे के प्रति गहन में नापसन्दगी न हो? क्यूँ हम सार्वभौमिक मूल्यों पर आधारित जीवन पद्धति विकसित नहीं कर पा रहे? पेप्सी सारी दुनिया पी सकती है, पिज़्ज़ा सारी दुनिया खा सकती, कम्पनी लोकल से Multi- national हो सकती हैं, लेकिन हम जीवन शैली सार्वभौमिक विकसित नहीं कर पा रहे. हम ऐसी दुनिया में क्यूँ रहें जहाँ हमें एक दूजे को बर्दाश्त कर कर जीना पड़े? जहाँ सहिष्णुता को बड़ा गुण माना जाता हो, ऐसे दुनिया के ताने बाने में निश्चित ही कुछ तो गड़बड़ है. है कि नहीं? वैसे ह...