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Showing posts from August, 2026

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मेरा यूटूएब चैनल - तुषार कॉस्मिक. My YouTube Channel - Tushar Cosmic

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Tushar   Cosmic     यह मेरा   यूट्यूब  चैनल  है.  नया है...ऑडियंस बनते-बनते बनेगी ..... आप मित्र गण  ही बनाएंगे .... यूट्यूब अपने आप कोई ऑडियंस देता नहीं है ..... खुद से बनानी होती है...... आप मित्रगण ही बना सकते हैं...बन सकते हैं ...वीडियो देखिये.....पूरा देखिये....... मेरा वादा है सीखने को मिलेगा निश्चित ही.                        https://www.youtube.com/@Tushar-Cosmic

मेरी कुछ ताज़ा फेसबुक पोस्ट

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  "मेरे बाल" मेरे बालों से बहुत लोगों को बहुत शिकायत रहती है. और यह शिकायत तब और ज्यादा उभर के सामने आती है जब मेरा लेखन या मेरा कथन किसी को बिल्कुल पसंद नहीं आता. और उनकी जमी-जमाई मान्यताओं के बिल्कुल उलट खड़ा होता है। शीर्षासन कर रहा होता है. तो ऐसे में भद्र-जनों को और कुछ नहीं मिलता तो वह सीधा मेरे बालों पर अटैक करते हैं कि यह बाल मेरे सिर पर क्यों है. तो सवाल यह है कि सिर मेरा है, बाल मेरे हैं, मेरे सिर पर है, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, दूसरों को दिक्कत क्यों होती है? कहीं ऐसा तो नहीं कि वह गंजे हैं. सोच कर बताइएगा आप सब लोग, कमेंट कीजिएगा. ~~~~~~~~~~~~~~~ साहब, Bog Boss,  वो भाषण बाज हैं मजमे बाज हैं बतौले बाज हैं एक्टिंग बाज हैं जुमले बाज हैं, नौटंकीबाज,ड्रामाबाज है। उनका ध्यान पैकिंग पर ज्यादा है। मटेरियल की क्वालिटी पर कम है। उनका ध्यान मार्केटिंग पर ज्यादा है। प्रोडक्ट पर कम है। उनका ध्यान सजे सवरे रहने में ज्यादा है। काम करने में कम है। बताएं मैं कौन से साहब की बात कर रहा हूं। बताने वाले को मिलेगा 100 एक रुपयों देने पर   धन्यवाद। ~~~~~~~~~~~~~~~ यह जो लोग क...

'हिंदू' शब्द और धर्म: एक विवेचना

यह थ्योरी काफी हद तक सही मानी जाती है कि सिंधु दरिया के इर्दगिर्द जो लोग रहते थे बाहर से जो लोग आए उन्होंने उनको हिंदू शब्द से पहचाना और फिर यहां के लोगों ने भी खुद को हिंदू शब्द से पहचानना शुरू कर दिया। अब सवाल यह है कि यह थ्योरी मान लेते हैं ठीक है तो फिर हिंदू कोई धर्म कैसे हुआ? यह तो एक भूभाग पर रहने वाले लोगों को पहचान दी गई उस भूभाग से बाहर के लोगों द्वारा तो यह एक भौगोलिक नाम कहा जा सकता है और "धर्म" का तो इससे कोई लेना देना है नहीं।  लेकिन आज हिंदू शब्द जो है वह कोई भौगोलिक पहचान नहीं है। वह एक खास तरह की मान्यताओं को मानने वाले लोगों को कहा जाता है। यह कहना है कि यह जो तथाकथित हिंदू लोग थे, यह "मानवता" को सर्वोपरि रखते थे,  तो मैं तो इससे कतई सहमत नहीं हूँ। पहली बात तो मैं मानवता के कॉन्सेप्ट से ही सहमत नहीं हूँ। —अगर मानवता में कुत्तियत नहीं है, बिल्लियत नहीं है, उसमें बकरियत नहीं है, उसमें भैंसियत नहीं है—तो मैं तो मानवता को एक बड़ा ही स्वार्थी किस्म का कॉन्सेप्ट मानता हूँ. मानव सिर्फ खुद को ही सेंटर में रख के एक आइडियोलॉजी गढ़ता है, इसलिए उसने एक शब्द ...