Posts

Showing posts from August, 2026

Featured post

भारत का चुनावी ढांचा: SIR विवाद, EVM बनाम बैलेट पेपर और बायोमेट्रिक-आधारित पारदर्शी समाधान

Image
## 1. मुख्य बिंदु और पृष्ठभूमि (Executive Summary) * **SIR की पृष्ठभूमि:** भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग द्वारा 'विशेष सघन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) अभियान चलाया गया। * **विवाद की वजह:** इस अभियान के तहत मतदाता सूचियों के गहन सत्यापन के लिए नागरिकों से वर्ष 2002-2004 तक के पुराने दस्तावेज़ मांगे गए और बड़े पैमाने पर नोटिस जारी किए गए। * **जनता की समस्या:** बाढ़, दंगे, पलायन, अनपढ़ता और पुराने वोटर कार्डों में मौजूद स्पेलिंग/उम्र की गलतियों के कारण 20-25 साल पुराने रिकॉर्ड देना आम नागरिकों के लिए अत्यंत कठिन और डरावना साबित हो रहा है। * **मूल प्रश्न:** जब देश में आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, बायोमेट्रिक्स और सर्वव्यापी पहचान डेटाबेस मौजूद हैं, तो कागजी सत्यापन और पुराने रिकॉर्ड्स के झंझट की क्या वास्तव में आवश्यकता है? --- ## 2. वर्तमान SIR प्रणाली की व्यावहारिक समस्याएँ ### क) पुराने दस्तावेज़ों और रिकॉर्ड्स का संकट * **22-25 साल का अंतराल:** 2002 के रिकॉर्ड खंगालना व्यावहारिक नहीं है। बाढ़, आग, प्राकृतिक आप...

*पश्चिम विहार की टाउन प्लानिंग: सरकारी 'आला दिमाग' के बेतुके नमूने*

Image
1. *गजब की ब्लॉक नंबरिंग*: हमारी सरकारें और उनके नुमाइंदे किस कदर घटिया ढंग से काम करते हैं, इसका जीता-जाता सबूत पश्चिम विहार ईस्ट की ब्लॉक नंबरिंग है। पश्चिम विहार की फॉल्टी जोनिंग और अटपटी नंबरिंग के दो स्थानीय उदाहरण 2. A-ब्लॉक की अव्यवस्थित क्रम संख्या:- * पश्चिम विहार में A-1 ब्लॉक से शुरू करने पर इसके साथ लगा हुआ एडजोइनिंग ब्लॉक A-2 आता है, जिसके बाद A-3 होना चाहिए था। * लेकिन इसके उलट, अगला ब्लॉक बीच में फंसा हुआ A-5 है, उसके बाद A-6 आता है, और फिर कहीं जाकर साइड में एडजोइनिंग ब्लॉक A-3 और उसके बाद A-4 आते हैं। 3. आउटर पश्चिम विहार में एलआईजी फ्लैट्स की अजीब नंबरिंग:- * इसकी दूसरी मिसाल आउटर पश्चिम विहार में देखने को मिलती है, जहाँ एलआईजी फ्लैट्स के दो ब्लॉकों को जोड़कर एक कर दिया गया है। * इन दोनों जुड़े हुए ब्लॉकों का संयुक्त नाम 'जीएच फाइव एंड सेवन' (GH 5 & 7) रखा गया है, जबकि 'जीएच सिक्स' (GH 6) इस ब्लॉक से पूरी तरह अलग और बाहर स्थित है। * अगर नंबरिंग का नियम देखा जाए, तो जुड़े हुए हिस्से को 'फाइव एंड सिक्स/ 5 & 6' और अलग वाले को 'सेव...

मेरी कुछ ताज़ा फेसबुक पोस्ट

Image
  "मेरे बाल" मेरे बालों से बहुत लोगों को बहुत शिकायत रहती है. और यह शिकायत तब और ज्यादा उभर के सामने आती है जब मेरा लेखन या मेरा कथन किसी को बिल्कुल पसंद नहीं आता. और उनकी जमी-जमाई मान्यताओं के बिल्कुल उलट खड़ा होता है। शीर्षासन कर रहा होता है. तो ऐसे में भद्र-जनों को और कुछ नहीं मिलता तो वह सीधा मेरे बालों पर अटैक करते हैं कि यह बाल मेरे सिर पर क्यों है. तो सवाल यह है कि सिर मेरा है, बाल मेरे हैं, मेरे सिर पर है, मुझे कोई दिक्कत नहीं है, दूसरों को दिक्कत क्यों होती है? कहीं ऐसा तो नहीं कि वह गंजे हैं. सोच कर बताइएगा आप सब लोग, कमेंट कीजिएगा. ~~~~~~~~~~~~~~~ मै वन्दे मातरम गा नहीं सकता, ना भाई, एक अंतरा भी नहीं। जन गण मन भी भूल चुका हूँ, बस कुछ टूटे-फुटे टुकड़े याद हैं। स्कूल के दिनों में गा लेता था जैसे बाकी सब गाते थे। तो क्या हुआ? कसम से, ये भारतीय नेता भी ना, एकदम ओवरस्मार्ट बेवकूफ हैं। फालतू की बातों का बतंगड़ बनाते हैं। देश का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए। इन गानों या anthems को लेकर एक-दूसरे पर इल्जाम लगाते रहते हैं। भला कोई ये कैसे तय कर सकता है कि मैं इस समाज ...

'हिंदू' शब्द और धर्म: एक विवेचना

यह थ्योरी काफी हद तक सही मानी जाती है कि सिंधु दरिया के इर्दगिर्द जो लोग रहते थे बाहर से जो लोग आए उन्होंने उनको हिंदू शब्द से पहचाना और फिर यहां के लोगों ने भी खुद को हिंदू शब्द से पहचानना शुरू कर दिया। अब सवाल यह है कि यह थ्योरी मान लेते हैं ठीक है तो फिर हिंदू कोई धर्म कैसे हुआ? यह तो एक भूभाग पर रहने वाले लोगों को पहचान दी गई उस भूभाग से बाहर के लोगों द्वारा तो यह एक भौगोलिक नाम कहा जा सकता है और "धर्म" का तो इससे कोई लेना देना है नहीं।  लेकिन आज हिंदू शब्द जो है वह कोई भौगोलिक पहचान नहीं है। वह एक खास तरह की मान्यताओं को मानने वाले लोगों को कहा जाता है। यह कहना है कि यह जो तथाकथित हिंदू लोग थे, यह "मानवता" को सर्वोपरि रखते थे,  तो मैं तो इससे कतई सहमत नहीं हूँ। पहली बात तो मैं मानवता के कॉन्सेप्ट से ही सहमत नहीं हूँ। —अगर मानवता में कुत्तियत नहीं है, बिल्लियत नहीं है, उसमें बकरियत नहीं है, उसमें भैंसियत नहीं है—तो मैं तो मानवता को एक बड़ा ही स्वार्थी किस्म का कॉन्सेप्ट मानता हूँ. मानव सिर्फ खुद को ही सेंटर में रख के एक आइडियोलॉजी गढ़ता है, इसलिए उसने एक शब्द ...