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मेरा यूटूएब चैनल - तुषार कॉस्मिक. My YouTube Channel - Tushar Cosmic

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Tushar   Cosmic     यह मेरा   यूट्यूब  चैनल  है.  नया है...ऑडियंस बनते-बनते बनेगी ..... आप मित्र गण  ही बनाएंगे .... यूट्यूब अपने आप कोई ऑडियंस देता नहीं है ..... खुद से बनानी होती है...... आप मित्रगण ही बना सकते हैं...बन सकते हैं ...वीडियो देखिये.....पूरा देखिये....... मेरा वादा है सीखने को मिलेगा निश्चित ही.                        https://www.youtube.com/@Tushar-Cosmic

सही परवरिश

सही परवरिश यह है कि बच्चों को मज़बूत बनाएं.

उन को जीत और हार दोनों पचाना सिखाएं.
उन को जीवन के छित्तर खाना सिखाएं, झेलना सिखाएं.
यदि आप ने अपने बच्चों को मज़बूत बनाना है तो उन्हें सुविधा-भोगी मत बनाएं.
यदि आप की कार ले कर देने की हैसियत है तो उन को साइकिल ले कर दें.
उन को धूप, ठंढ झेलना सिखाएं. उन को समझाएं कि वो बर्फ़ के नहीं बनें हैं जो बारिश में-धूप में पिघल जाएंगे, वो तिनकों के नहीं बने हैं जो आँधी में उड़ जाएंगे।
कभी मत सोचें कि जो कष्ट मैंने झेले हैं, वो मेरे बच्चे न झेलें. बिना कष्ट झेले वो कष्ट झेलने की ताकत ही पैदा न कर पायेंगे.
उन्हें अस्पताल, श्मशान, कोर्ट कचहरी, पुलिस थाना सब दिखाएं. वहाँ क्या होता है, एक आम इंसान की इन जगहों में क्या औकात है, यह समझाएं.
देखा है अमीरों के बच्चे कैसे लुंज-पुंज होते हैं? एक दम धरती पर बोझ. गरीबी मार देती है, अमीरी भी मार देती है. अथाह पैसा भी बच्चों को बर्बाद कर देता है. बच्चों को नशेड़ी, उछृंकल बना देता है, गैर-ज़िम्मेदार बना देता, बद-तमीज बना देता है, उन को अच्छे-बुरे की समझ भुला देता है.
मेरे परिवार में दो बच्चे इसलिए मर चुके हैं चूँकि पैसा ज़रूरत से ज़्यादा था, समझ थी नहीं. उन के माँ-बाप ज़िंदा हैं. वो मारे गए. गलत परवरिश ने उन्हें मार दिया. आप के बच्चों के साथ ऐसा न हो, इसी लिए यह सब लिखा है.
उन्हें बंद चार-दीवारी के पौधे की बजाए खुली हवा धूप में रहने वाला पेड़ बनाएं.
उन्हें पेड़ों पर चढ़ना, शाखों से लटकना, घास में लौटना, बारिश में नहाना सिखाएं. उन्हें घंटों दौड़ना सिखाएं, उन्हें तैरना, रस्सी कूदना, योगासन, बॉक्सिंग सिखाएं. उन्हें फौजी ट्रेनिंग दें, उन्हें मैराथन दौड़ाक की ट्रेनिंग दें. उन्हें सेल्फ डिफेन्स सिखाएं, उन्हें कमाना सिखाएं बचपन से ही.
उन के बचपन को मज़बूत बनाएं , उन की जड़ों को, नींव को मज़बूत बनाएं, तो ही उन का आगे का जीवन, उन की बिल्डिंग मज़बूत बनेगी. एक बार मेरी माँ ने कपड़े धोने वाली लकड़ी की थापी से मुझे कूटा था. उस कुटाई में कितना प्यार होगा, चोट मुझे लगी होगी तो मुझ से ज़्यादा मेरी माँ को भी लगी होगी. आज तो हम ऐसे समझते हैं, जैसे बच्चों ने हमारे घर पैदा हो कर हम पर अहसान कर दिया है.

मैं अक्सर कहता हूँ, "औलाद और शरीर छित्तर मार कर के पालो तो ही सही रहेंगे."

तुषार कॉस्मिक

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