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Does God Exist? Review - जावेद अख़्तर और मुफ़्ती शमाइल की लल्लनटॉप डिबेट का रिव्यु

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" Does God Exist?  डिबेट  का ग़लत टाइटल "  बहस का टाइटल है गॉड पर और दोनों व्यक्ति बहस कर रहे हैं खुदा पर. पहले  यह तो तय कर लेते कि बहस किस पर है. क्या गॉड, ईश्वर, अल्लाह एक ही हैं? " ईश्वर  अल्लाह तेरो नामा." क्या यह सही है? नहीं है.  ईश्वर को मानने वाले भी क्या मोहम्मद को ईश्वर का आखिरी पैगंबर मानते हैं? नहीं मानते तो फिर कैसे हो गए सब एक. भाई,  ईसाई भी तो हज़रत मोहम्मद साहेब को अपना पैगंबर नहीं मानते तो कैसे इन शब्दों का एक ही मतलब है. सो पहले तो बहस यह होनी चाहिए थी कि  किस गॉड/खुदा/ अल्लाह पर बहस हो रही है. " Does God Exist?  डिबेट के लिए ग़लत कैंडिडेट का चुनाव "  इस्लाम में गॉड का कोई कांसेप्ट है भी? इस्लाम में तो सिवा अल्लाह के कोई और कांसेप्ट ही नहीं है तो फिर मुफ़्ती होते हुए डिबेट गॉड पर कैसे? अल्लाह पर करते न  डिबेट . वो अल्लाह जिस के अलावा कोई और पूजने के काबिल नहीं, मोहम्मद साहेब जिस के रसूल हैं.  मुफ़्ती  कैसे किसी और गॉड पर डिबेट कर सकते हैं? खैर  मुफ़्ती  की डिबेट घूम-फिर कर अल्लाह  पर ही थी, गॉड...