जंग के साये में इंसानियत: क्या धर्म और राष्ट्र की सीमाएँ हमारा भविष्य खा जाएँगी?
पाकिस्तान-अफगानिस्तान युद्धरत हैं. इजराइल-फिलस्तीन युद्धरत हैं. रूस-उक्रेन युद्धरत हैं. अब अमरीका और इजराइल मिल कर ईरान के साथ युद्धरत हैं. अभी पीछे कम्बोडिया और थाईलैंड भी युद्धरत थे. छोटी-मोटी मार-काट चलती ही रहती है लेकिन उस छोटी-मोटी मार-काट में हज़ारों लोग मर-कट जाते हैं. यह है हमारी दुनिया. हम अपने भोजन के लिए मुर्गे, बकरे, मछली तो मारते-काटते ही हैं लेकिन अपनी खोखली समझ की वजह से एक दूजे को भी मारते काटते आ रहे हैं सदियों से. यह है हम. इंसान। कुदरत का बेहतरीन शाहकार। खुदा का सर्वश्रेष्ठ नमूना। दुनिया में गोरे-काले, ऊंचे नीचे, अमीर-गरीब, औरत-मर्द, सब में फर्क है. यह है हमारी दुनिया। ऊपर से हम एटम बम भी बना कर बैठे हैं. ऊपर से हमारे हुक्मरान। वल्लाह। माशाल्लाह। इलाज क्या है? पहले तो समझ लो यह दुनिया इसी तरह से बहुत देर तक चल नहीं पायेगी। हमारी अगली पीढ़ियाँ शायद ही इस धरती पर आ पाएँ। हद मार के एक या दो. क्यों? चूँकि वक्त के साथ-साथ मूढ़ता बढ़ती जा रही है. बर्बादी के साजो सामान बढ़ते चले जा रहे हैं. इलाज क्या है? सब धर्मों को विदा करो. नहीं चाहिए। इन की वर्ल्ड वाइड बहस करवाओ, लम्ब...