1. *गजब की ब्लॉक नंबरिंग*:
हमारी सरकारें और उनके नुमाइंदे किस कदर घटिया ढंग से काम करते हैं, इसका जीता-जाता सबूत पश्चिम विहार ईस्ट की ब्लॉक नंबरिंग है।
पश्चिम विहार की फॉल्टी जोनिंग और अटपटी नंबरिंग के दो स्थानीय उदाहरण
2. A-ब्लॉक की अव्यवस्थित क्रम संख्या:-
* पश्चिम विहार में A-1 ब्लॉक से शुरू करने पर इसके साथ लगा हुआ एडजोइनिंग ब्लॉक A-2 आता है, जिसके बाद A-3 होना चाहिए था।
* लेकिन इसके उलट, अगला ब्लॉक बीच में फंसा हुआ A-5 है, उसके बाद A-6 आता है, और फिर कहीं जाकर साइड में एडजोइनिंग ब्लॉक A-3 और उसके बाद A-4 आते हैं।
3. आउटर पश्चिम विहार में एलआईजी फ्लैट्स की अजीब नंबरिंग:-
* इसकी दूसरी मिसाल आउटर पश्चिम विहार में देखने को मिलती है, जहाँ एलआईजी फ्लैट्स के दो ब्लॉकों को जोड़कर एक कर दिया गया है।
* इन दोनों जुड़े हुए ब्लॉकों का संयुक्त नाम 'जीएच फाइव एंड सेवन' (GH 5 & 7) रखा गया है, जबकि 'जीएच सिक्स' (GH 6) इस ब्लॉक से पूरी तरह अलग और बाहर स्थित है।
* अगर नंबरिंग का नियम देखा जाए, तो जुड़े हुए हिस्से को 'फाइव एंड सिक्स/ 5 & 6' और अलग वाले को 'सेवन/ 7' होना चाहिए था, लेकिन ऐसा न करके नंबरिंग पूरी तरह उलझा दी गई है।
*इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहाँ के नक्शा-नवीस (मैप मेकर्स) किस स्तर के रहे होंगे, जिन्हें ब्लॉक्स की ठीक से नंबरिंग तक करनी नहीं आई और जहाँ मर्जी जो समझ आया, नंबर दे दिया गया। पता नहीं जिस भी इंजीनियर ने यह नंबरिंग की, वह कहां से पढ़ाई करके आए थे।
4. *टेढ़े-मेढ़े इंटरसेक्शन*:- इसके अलावा, आप कोई भी इंटरसेक्शन देख लीजिए। अगर आप मादीपुर से पश्चिम विहार में एंटर करेंगे और बालाजी हॉस्पिटल की तरफ आएंगे, तो वह सीध में नहीं है। आपको राइट साइड थोड़ा लेकर फिर पश्चिम विहार में एंटर करना पड़ेगा। इंटरसेक्शन बिल्कुल सीध में है ही नहीं—चाहे ए-3 ब्लॉक से A-1 में जाना हो, चाहे B-1, B-2 में जाना हो. और चाहे A-6 से A-1 में जाना हो, कोई भी इंटरसेक्शन सीध में नहीं है। सब में थोड़ा आड़ा-टेढ़ा होकर ही लोगों को एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक में जाना पड़ता है।
यह है उस शख्स के 'आला दिमाग' की वजह जिसने पश्चिम विहार के ब्लॉक डिजाइन किए होंगे।
5. *फ्लैट्स और मार्केट की उल्टी-पुल्टी ज़ोनिंग*:
सरकारी और सरकारी लोगों के बेहतरीन दिमाग की अगली मिसाल देखिए। पश्चिम विहार में जहां इन्हें फ्लैट्स बनाने चाहिए थे, वहां इन्होंने मार्केट बना दी और जहां मार्केट बनानी चाहिए थी, वहां फ्लैट्स बना दिए।
ए-6 ब्लॉक में जो शिवा ऑटो वाली-शंकर ढाबे वाली मार्केट है, वह एक ऐसी दबी हुई लोकेशन थी कि वहां मार्केट बनाने का कोई लॉजिक ही नहीं था।
देखा जाए तो यह वन-साइडेड रोड है जो ए-6 से चलती हुई आती है और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पर आकर खत्म हो जाती है, जिसके बाद बस पतली-पतली गलियां हैं—एक ए-4 डीडीए फ्लैट्स में जाती है और एक आनंदवन व त्रिवेणी अपार्टमेंट्स की तरफ निकल जाती है।
तो एक डेड-एंड पॉइंट पर डीडीए मार्केट बना दी, जो बीसियों साल पहले बनी थी और आज भी ठीक से चल नहीं पाई। वहां फ्लैट्स बनने चाहिए थे, लेकिन मार्केट बना दी।
6. दूसरी मिसाल A-2-B के फ्लैट्स की है, जो सीए अपार्टमेंट के सामने हैं। ये फ्लैट्स बिल्कुल मेन रोड पर हैं, जो ज्वाला हेड़ी से चलते हुए सीधा रोहतक रोड पर पेट्रोल पंप के आगे से निकलता है। इतनी प्राइम मेन रोड की लोकेशन पर रेजिडेंशियल हाउस बनाने की बजाय अगर डीडीए पूरा कमर्शियल पॉइंट बना देती, तो वह far better होता, लेकिन वहां डीडीए फ्लैट्स बना दिए।
7. *टाउन प्लानिंग की पोल खोलता संकरा रास्ता और जाम*:-
जिस ए-6 डीडीए मार्केट (शंकर ढाबे वाली मार्केट) की मैंने बात की, वहाँ से कोई 6-7 फीट चौड़ा और 20-30 फीट लंबा एक छोटा सा रास्ता निकलता है। उस रास्ते से टू-व्हीलर्स निकलते हैं और आनंदवन-त्रिवेणी अपार्टमेंट्स की तरफ, एलिना मोटर्स के आगे से होते हुए निकलते हैं। यह जो 6-7 फीट चौड़ा रास्ता है, यह सिर्फ टू-व्हीलर्स के निकलने के काम आता है और इसमें कई बार थ्री-व्हीलर बैटरी रिक्शा वाले भी घुस जाते हैं। यहां शाम के समय वर्किंग डेज में दोनों तरफ जबरदस्त रश होता है। किसी भी वेल-मैनेज्ड कॉलोनी में यह दृश्य आपको साफ बता देगा कि टाउन प्लानर्स ने कितनी 'अकल' लगाई होगी।
ऐसी तमाम चीजें और मिसाले हैं जो यह बता देंगी कि हमारी सरकारें किस तरह से काम करती थीं और आज भी किस तरीके से काम करती हैं और कितनी अकल लगाती हैं।
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Paschim Vihar, Delhi की District Park की सूखी झील
*हमारी सरकार किस कदर घटिया ढंग से काम करती है। इसका एक और मैं आपको लोकल Example, मिसाल, Specimen दे रहा हूं* ~ *प्रशासनिक विरोधाभास और लाल फीताशाही का लोकल नमूना
1. *District Park की सूखी झील और सरकारी लापरवाही*
डिस्ट्रिक्ट पार्क के ठीक बीचों-बीच एक काफी बड़ी झील हुआ करती थी, जो सालों से सूखी हुई है और वहाँ से पानी पूरी तरह गायब हो चुका है।
किसी जमाने में वहाँ पानी और बत्तखें हुआ करती थीं, और उन बतकों के लिए डक हाउसेस/ Duck Houses भी बने हुए हैं जो आज खाली पड़े हैं जिनके बाहर मैंने महीनों तक एक्सरसाइज की है और इस पार्क के इस हिस्से को मैं बहुत ही अच्छे से जानता हूँ।
2. *विरोधाभासी कदम: बेंच लगाना और कटीली तार खींचना*
सूखी हुई झील के किनारे-किनारे कुछ सीमेंट के लाल रंग से पुते हुए बेंच लगाए गए ताकि लोग उन पर बैठ सकें।
फिर एकाएक सरकार को ध्यान आया कि इस सूखी हुई झील के पूरे गोले में काफी ऊंची Barbed wire/ कटीली तार लगा दी गई।
इसके दोनों गेटों को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया ताकि कोई अंदर enter ही न कर सके।
3. *बेतुके चेतावनी बोर्ड और जनता की आवाजाही*
सूखी हुई झील के किनारे आज भी बोर्ड लगे हुए हैं कि झील में पानी है. सावधानी के बोर्ड लगाए गए हैं।
झील सूखी होने के कारण उसमें लोगों का आना-जाना वैसे ही नहीं था, इक्का-दुक्का स्कूल के बच्चे आ जाया करते थे।
बच्चे आज भी ये तारें लांघकर पहुँच जाते हैं और मेरे जैसे लोग जिन्हें वहाँ एक्सरसाइज करनी होती है, वे आज भी तारों के ऊपर-नीचे दाएँ-बाएँ से होकर enter कर जाते हैं।
4. *जनता के सवालों और सुझावों की अनदेखी*
मेरा पॉइंट यह है कि अगर झील में कटीली तार लगानी थी, तो बेंच क्यों लगाए गए? वे बेंच आज भी वहाँ पर हैं।
और अगर बेंच लगाने थे, तो फिर बाद में कटीली तार क्यों लगाई गई?
जब पानी है ही नहीं, तो यह बोर्ड क्यों लगा रखा है कि वहाँ झील में पानी है, और अगर बोर्ड लगा रखा है, तो फिर पानी क्यों नहीं है?
5. *सरकारी धन की फिजूलखर्ची और जनता के विकल्प*
मैंने इसकी कंप्लेंट दी कि या तो इसको पानी से भर दो, इसे ढंग से झील बना दो और नहीं बना सकते हो तो इसे पूरी तरह सुखा दो।
इसे साफ-सुथरा कर दो, घास-पात हटा दो और पब्लिक के लिए खोल दो; सुखा ही रखो इसे और यह प्लेग्राउंड के काम आएगा, पब्लिक की एक्सरसाइज के काम आएगा, बच्चों के झूले लगा दो, उनके काम आएगा।
आज की डेट में इतनी बड़ी जगह किसी भी काम में नहीं आ रही है।
उसमें पानी डालने के लिए डिस्ट्रिक्ट पार्क के अंदर बहुत मोटा पाइप लाया गया, उसके बावजूद उस झील में कोई पानी होता नहीं है और उस पाइप पर भी लाखों रुपए फिजूल में खर्च हुए।कटीली तार लगाने पर भी लाखों रुपए फिजूल में खर्च हुए हैं, और अंदर जो बेंच लगाए, उन पर हजारों खर्च हुए हैं, वह भी waste हैं।
6. *मलबे और कूड़े को छुपाने का एक और प्रशासनिक नमूना*
* जीडी गोयनका स्कूल वाली रोड (मेजर अश्विनी कण्व मार्ग) पर डिस्ट्रिक्ट पार्क की दीवार के साथ-साथ पूरा मलबा और कूड़ा भरा पड़ा है, जबकि यह कोई गार्बेज डंपिंग/ Garbage Dumping Site/साइट नहीं है।
* सफाई करने या रखरखाव रखने के बजाय, कूड़ा नजर न आए, इसके लिए वहाँ सीमेंट के बैरिकेड लगा दिए गए हैं।
* उन सीमेंट के बैरिकेड्स पर भी लाखों रुपए खर्च हुए होंगे, जिनका वहाँ लगाने का कोई और तर्क या मतलब नहीं है, सिवाय गंदगी को छुपाने के।
*आप आज भी जाकर देख सकते हैं, वह झील आज भी सूखी हुई है, वह कटीली तार भी है, मोटा पाइप भी लगा है, वह छुटपुट बेंच भी लगे हुए हैं और वह पूरा इतना बड़ा land piece निरर्थक/ waste and useless पड़ा हुआ है, पार्क के बाहर दीवार के साथ साथ कूड़ा भी है, सीमेंट के बार्रिकडेस भी हैं ।*
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FAULTY ROAD REPAIR IN FRONT OF A-6 GARBAGE DEN
* A-6 का जो बड़ा कूड़ा घर है, उसके ठीक आगे एक टुकड़ा सड़क का बनाया गया है।
* यह टुकड़ा जो है ना, स्पेसिमन है, सैंपल है, नमूना है कि हमारी सरकारें किस कदर घटिया काम करती हैं।
* कैसे? सड़क से लगभग चार से छह इंच ऊपर उठा के बनाया गया है यह टुकड़ा। दोनों तरफ से एकदम जैसे खड़ी दीवार होती है, ऐसे। ढलान नहीं बनाई गई, दोनों तरफ से। जब आपकी गाड़ी चढ़ेगी इस टुकड़े पर और उतरेगी, तो सीधी खड़ी जैसे दीवार होती है, ऐसे आपकी गाड़ी दीवार से टकराती ऊपर चढ़ेगी।
* अगली बात यह कि यह सारी ही सड़कें जो है, हमारे इर्द-गिर्द की, टूटी हुई थीं। Froebel School से लेकर और इंद्रप्रस्थ स्कूल तक, और उधर शुभ निकेतन से लेकर काली मंदिर से होते हुए हमारे फ्लैटों में से होते हुए और जावा नर्सिंग होम तक। सारी सड़कें टूटी-फूटी हैं। तो यह टोटे-टोटे बनाते हैं बीच में और टोटे बनाने का क्या लॉजिक है जब सारी सड़क ही टूट रखी है? पूरी सड़क बनानी चाहिए।
* और दूसरी बात, सड़क का लेवल क्यों उठाते हैं? जो पहले की/एग्जिस्टिंग सड़क है, उसको पूरी तरह से तोड़ा नहीं जाता और उसी के ऊपर एक लेयर बिठा दी जाती है। तो सड़कें ऊंची उठती चली जाती हैं। और जो अंदर गलियों में सड़कें होती हैं, वहाँ ज्यादा नुकसान इसलिए होता है कि सड़क ऊपर उठ जाती है और घर नीचे दब जाते हैं। तो यह है एक नमूना कि हमारी सरकार, हमारी सरकारें किस कदर जो है काम करती हैं, किस कदर अदूरदर्शी ढंग से काम करती हैं उसका नमूना।
Tushar,
Your friendly neighborhood
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