Sunday, 28 July 2024

इस्लाम पर ओशो ने क्या कहा है? Osho on Islam in Hindi, Osho Islam ke bare mein kya kahte hain? Osho ne Islam ke bare mein kya kaha?, Osho on Quran in Hindi. Osho on Muhammad in Hindi

 इस्लाम के बारे में ओशो ने शुरुआती दौर में कुछ सकारात्मक बातें की थीं। 

ओशो ने कुरान को धम्मपद, उपनिषद, गीता, ताओ ते चिंग के समकक्ष  दिव्य सिद्ध करते हुए थोड़ी सी चर्चा की. वह बताते हैं कि मुहम्मद एक अनपढ़ आदमी थे,  बावजूद  इस के उनकी बातें बुद्ध या उपनिषद के ऋषियों के परिष्कृत शब्दों से कम गहरी नहीं हैं। रिफरेन्स के लिए उन  का प्रवचन नं.5,  दीपक बार नाम का नामक किताब में देखा जा सकता है. 

लेकिन बाद में उन्होंने इस्लाम को  सिरे से नकार दिया.

ओशो ने बताया है कि कई बार मुस्लिम मित्रों द्वारा कहा गया कि वो क़ुरआन पर भी बोलें  लेकिन उन्होंने  इनकार कर दिया क्योंकि उन्हें यह निरर्थक लगा. उन्होंने विभिन्न ग्रंथों पर, और कबीर, बुल्ले शाह, मीरा बाई आदि पर प्रवचन दिए क्योंकि उन्हें इन लोगों के शब्दों और जीवन में कुछ सार मिला.

कुरान उन्हें बेकार लगा और ऐसा उन्होंने अपने जीवन के अंतिम चरण में कहा। 

ओशो ने कहा कि सभी संगठित धर्म बेकार हैं, हाँ, यही कहा उन्होंने।  लेकिन फिर वो जप जी साहेब पर लम्बा व्याख्यान देते हैं. क्यों? चूँकि जपजी साहब में कुछ सार है, और जप जी साहेब  सिखी के एक संगठित धर्म बनने से बहुत पहले आया था, इसलिए उन्होंने इसे चुना और इस पर बात की।

उन्होंने कबीर के शब्दों को चुना और उन पर बात की.

उन्होंने बुद्ध के शब्दों पर बात की, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुरूप थे, उन्होंने बुद्ध के शब्दों में जीवन में बस कुछ सार पाया और इस लिए इसलिए इस विषय पर बात की।

उन्होंने कई कम ज्ञात संतों और फकीरों पर बोलने का विकल्प चुना। लेकिन क़ुरआन छोड़ दी. 

देखिए उन्होंने क्या कहा, 'अचेतनता से चेतना तक/अध्याय #5' में:-- "मोहम्मद बिल्कुल अनपढ़ आदमी था, और कुरान, जिसमें उसकी बातें एकत्र की गई हैं, निन्यानवे प्रतिशत बकवास है। आप बस कहीं भी किताब खोल सकते हैं और इसे पढ़ सकते हैं, और आप मैं जो कह रहा हूं, उसके प्रति आप आश्वस्त हो जाएंगे। मैं किसी खास पन्ने पर नहीं कह रहा हूं--कहीं भी, आप गलती से किताब खोल लें, पृष्ठ पढ़ लें और आप आश्वस्त हो जाएंगे कि मैं क्या कह रहा हूं।

कुरान में इधर-उधर जो भी एक प्रतिशत सत्य है वह मोहम्मद का नहीं है। यह केवल सामान्य, प्राचीन ज्ञान है जिसे अशिक्षित लोग आसानी से एकत्र करते हैं - शिक्षित लोगों की तुलना में अधिक आसानी से, क्योंकि शिक्षित लोगों के पास जानकारी के कहीं बेहतर स्रोत होते हैं - किताबें, पुस्तकालय, विश्वविद्यालय, विद्वान। अशिक्षित लोग, बूढ़ों की बातें सुनकर ही इधर-उधर से ज्ञान की कुछ बातें इकट्ठा कर लेते हैं। और वे शब्द महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि हजारों वर्षों से उनका परीक्षण किया गया है और किसी तरह सत्य पाया गया है। तो यह युगों-युगों का ज्ञान है जो इधर-उधर बिखरा हुआ है; अन्यथा, यह दुनिया की सबसे साधारण पुस्तक है।

मुसलमान मुझसे पूछ रहे हैं, "आप कुरान पर क्यों नहीं बोलते? आपने बाइबिल, गीता, इस और उस पर बात की है।" मैं उनसे यह नहीं कह सका कि यह सब बकवास है; मैं बस टालता रहा. मेरे मौन में जाने से ठीक पहले, एक मुस्लिम विद्वान ने कुरान का नवीनतम अंग्रेजी संस्करण भेजा और मुझसे इस पर बोलने की प्रार्थना की। लेकिन अब मुझे कहना पड़ रहा है कि यह सब बकवास है, इसीलिए मैंने इस पर बात नहीं की है - क्योंकि अनावश्यक रूप से समय क्यों बर्बाद करें? और यह एक पैगम्बर, ईश्वर के दूत की ओर से है!"

जी, यह सब कहा ओशो ने क़ुरआन के विषय में, सब रिकार्डेड है. 

यह सही है कि उन्होंने कहा कि सभी संगठित धर्म मानवता के लिए खतरनाक हैं।

लेकिन वह यह भी जानते थे कि इस्लाम सबसे खतरनाक है, इसीलिए उन्होंने इस्लाम की आलोचना करने से परहेज किया। 

और ये भी उन्होंने कहा. जान का जोखिम क्यों उठाया जाए?  उन्होंने कहा:-- "बहुत सारे मुसलमान मित्रों ने मुझसे पूछा है, "आपने कई धर्मों पर बात की है, आप कुरान पर क्यों नहीं बोलते?"

मैंने (यानि ओशो ने) कहा, "क्या आप चाहते हैं कि मेरी हत्या कर दी जाए?" इस बीच मुझे कुछ और भी करना है। अंत में, जब मुझे लगेगा कि मेरे लिए शरीर छोड़ने का समय आ गया है, तो मैं कुरान पर बोलूंगा। और मैं अपने किसी संन्यासी से मुझे मरवा कर अपने काम के लिए 26 लाख डॉलर ले लूंगा! हालांकि मेरा काम अधूरा है, मैं पवित्र धर्मग्रंथों पर बोलने नहीं जा रहा हूं, क्योंकि वे साहित्य का सबसे आदिम प्रकार हैं।'' ----celebr05

यह सब कहा ओशो ने. और मैं स्वयं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सभी धर्म जहर हैं लेकिन इस्लाम पोटेशियम साइनाइड है।

सब धर्म गिरोह है और इस्लाम माफिया है. 

उन्होंने भी यही निष्कर्ष निकाला है इसलिए वह इस्लाम पर टिप्पणी करने से बचते हैं।

और उनकी तरफ से क़ुरान की जो भी आलोचना आई, वह भी उनके जीवन के अंतिम चरण में ही आई, जब उन्हें लगा कि उनका काम लगभग पूरा हो चुका है. उन्हें जो भी महत्वपूर्ण बात कहनी थी, वह पहले ही कह चुके थे, तभी उन्होंने यह कहने का जोखिम उठाया कि कुरान बिल्कुल बकवास है।

बस. 

नमन. 

तुषार कॉस्मिक 

Saturday, 27 July 2024

मेरा यूटूएब चैनल - तुषार कॉस्मिक. My YouTube Channel - Tushar Cosmic

Tushar Cosmic   यह मेरा यूट्यूब चैनल है. नया है...ऑडियंस बनते-बनते बनेगी ..... आप मित्र गण  ही बनाएंगे .... यूट्यूब अपने आप कोई ऑडियंस देता नहीं है ..... खुद से बनानी होती है...... आप मित्रगण ही बना सकते हैं...बन सकते हैं ...वीडियो देखिये.....पूरा देखिये....... मेरा वादा है सीखने को मिलेगा निश्चित ही.






            

जानवर हमारा परिवार हैं. Animals are our Family.


जानवर मुझे छोटे बच्चे जैसे लगने लगे हैं. उन में ज़्यादा बुद्धि नहीं है, सो इनोसेंट भी लगते हैं. मेरा लगाव-झुकाव पशु-पक्षियों की तरफ बढ़ता ही जा रहा  है. सोचता हूँ, मैंने आज तक इस नज़र से क्यों नहीं देखा दुनिया को कि जानवर हमारे छोटे भाई-बहन जैसे हैं, हमारे छोटे से-प्यारे से मित्र हैं. जानवर हमारा परिवार हैं. Animals are our family. 

क्या सिक्ख हिन्दू होते हैं? Kya Sikh Hindu hote hain?

 

Thursday, 25 July 2024

इस्लाम की विदाई क्यों और कैसे?


"इस्लाम की विदाई क्यों और कैसे?"

एक समय था चर्च ही कोर्ट था और राजा न होते हुए भी चर्च ही राजा था. चूँकि राजा पर, राज्य पर चर्च का प्रभाव ही इतना ज़्यादा था. और यह लगभग दुनिया में सब जगह था और दुनिया के सब धर्मों में था. लेकिन फिर पीछे चर्च की पकड़-जकड़ काफी कुछ कम हो चुकी थी, तभी पश्चिमी देशों ने एक-दम विज्ञान में जम्प किया. भारत में भी तथाकथित हिन्दू लोग धर्म को जीने-मरने का सवाल नहीं मानते थे. बल्कि अपने ही धर्म पर सवाल उठाते रहते थे. राम ने गर्भवती सीता को वनवास क्यों दिया? इस तरह की चर्चा/बहस निरंतर चलती रहती थी.

लेकिन आज मैं देखता हूँ, एक बड़ा तबका फिर से तथाकथित धर्म पर जोर देने लगा है. ऐसा क्यों? क्या है वजह?

इस्लाम! इस्लाम है वजह.
इस्लाम टस से मस नहीं हुआ. न हो रहा है. वो सातवीं सदी में घसीट दुनिया को पीछे ले जाना चाहता है. उस की वजह से जन-मानस जो अपने धर्मों से ऊपर उठता जा रहा था, उसे फिर से इस उलझन में फँसना पड़ रहा है. उस के दौड़ते हुए पांव, रुक गए हैं. उस की उड़ान थम गई है.

और
इस्लाम के पास बस एक ही चीज़ है जिस से वो दुनिया को हैरान, परेशान कर रहा है, वो है तादाद. गिनती. जनसंख्या. इस के अलावा इस्लाम के पल्ले कुछ नहीं है. कोई ज्ञान-कोई विज्ञान नहीं, कुछ नहीं.

मैं देखता हूँ तमाम लोग लगे हैं रोज़ाना राजनितिक बहसों में. अखबार, यूट्यूब, फेसबुक भरा है. किस राजनेता ने क्या कहा? क्या करा? कोई फायदा नहीं. वो सब शाखाओं पर ध्यान केंद्रित करना है. जड़ पर नहीं.

सारी राजनीति, समाज-नीति इस्लाम में उलझी हुई है. भारत की अधिकाँश राजनीति, अधिकाँश ऊर्जा मुसलमान को मैनेज करने में ही लगी रहती है. और अब तो यूरोप और कई और मुल्कों में भी काफी कुछ यही हाल है.

इसलिए
सारा ज़ोर इस्लाम को विदा करने पर होना चाहिए. और इस का एक इलाज़ हैं एक्स-मुस्लिम. उन से ज़्यादा इस्लाम को कौन समझता है?

एक होता है "Explosion" और एक होता "Implosion". यह "Implosion" बड़ा कीमती शब्द है इस संदर्भ में. किसी चीज़ का फट जाना, बम की तरह से. किसी बाहरी बम्ब-बन्दूक से नहीं, खुद ही फट जाना अंदर से ही. ये एक्स-मुस्लिम Implosion पैदा कर रहे हैं इस्लाम में. अभी शुरुआत है.

इलाज है, एक तो गैर-मुस्लिम को एक्स-मुस्लिम को ताकतवर बनाना चाहिए और दूसरा खुद भी इस्लाम को पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए. इस के लिए तमाम वीडियो हैं , बहुत से लेख हैं इंटरनेट पर. हिंदी-अंग्रेज़ी और बहुत सी भाषाओँ में. इस्लामिक ग्रंथों के रिफरेन्स के साथ इस्लाम के हिंसक, अतार्किक, अवैज्ञानिक चेहरे को बेनक़ाब कर देना चाहिए.

गली-गली. नुक्क्ड़-नुक्क्ड़. हर ऑफलाइन-ऑनलाइन प्लेटफार्म पर.

और ताकत मुस्लिम पर लगाने की ज़रूरत नहीं है. यह ताकत गैर-मुस्लिम को गैर-मुस्लिम पर ही लगानी है. अगर गैर-मुस्लिम ठीक-ठीक इस्लाम के खतरे को समझ ले तो मुस्लिम का सर्वाइव करना वैसे ही मुश्किल हो जायेगा.

अभी देखा न, योगी जी का आर्डर था दुकानों पर नाम प्लेट लगाने का कांवड़ मार्ग पर, तो कैसे मुस्लिम और मुस्लिम समर्थक शोर मचाने लगे, कोर्ट पहुँच गए. क्यों? चूँकि मुस्लिम को गैर-मुस्लिम से धंधा न मिलने का खतरा था.

ज़रा सा गैर-मुस्लिम का समर्थन हटा, इस्लाम चरमराने लगेगा.

एक और बात, पूरी दुनिया के सेक्युलर मुल्कों को (भारत समेत) एक्स-मुस्लिम को शरण देनी चाहिए, सेफ्टी-सिक्योरिटी देनी चाहिए. अलग ज़ोन ही बना दें चाहे एक्स-मुस्लिम के लिए. सेफ जोन. एक्स-मुस्लिम का सैलाब आ जायेगा.

इस तरह से मामला हल होगा. एक तरफ से Implosion एक्स-मुस्लिम द्वारा और दूसरी तरफ से Explosion गैर-मुस्लिम द्वारा. और यह Implosion और Explosion वैसा नहीं है जैसा मुस्लिम "अल्लाह-हू-अकबर" का नारा लगा कर करते हैं, फट जाते हैं कहीं भी. या बम्ब/गोला बारूद फाड़ देते हैं कहीं भी. न, कतई नहीं. यह विचारात्मक जँग होगी.

इस जँग को लड़ो वरना तमाम तरक्की पर जँग लगती जा रही है.

अब जब इतना कुछ मैंने कहा है तो इस का अर्थ यह कतई नहीं है कि बाकी धर्मों के कचरे का, अंध-विश्वासों का समर्थन किया जाये, नहीं, बखिया सब धर्मों की उधेड़ो, इन का धरती पर कोई काम नहीं. इन की किताबों को अलमारी में बंद कर के रख देना चाहिए. कभी-कभार रिफरेन्स के लिए खोल लो बस. बाकी इन का कोई काम नहीं.

"हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई, आपस में सब भाई-भाई."
भाई भाई, मतलब सब बराबरी, सब में प्यार. इस से बड़ा झूठ, इस से ज़्यादा बकवास बात कोई क्या ही होगी. इंसान सब बराबर तभी तक होते हैं, जब तक उन में समाज द्वारा सॉफ्टवेयर अपलोड नहीं होते।

एक बार सॉफ्टवेयर डल गए तो सब की "डिफ़ॉल्ट सेटिंग" गड़बड़ा जाती है. अब सब का बाजा अलग ही बजता है. सब का आचार-वयवहार अलग हो जाता है. सब की सामाजिक, ऐतिहासिक, राजनीतिक समझ अलग हो जाती है. सब रोबोट हो जाते हैं. रोबोट की तरह जीते हैं, रोबोट की तरह मरते हैं. रोबोट की तरह ही वोट देते हैं, रोबोट की तरह ही बच्चे पैदा किये जाते हैं.

सब खुद को तीस मार खान समझने लगते हैं और दूसरे को तुच्छ. आज की दुनिया में इस में सब से ज़्यादा खतरनाक सॉफ्टवेयर "इस्लाम" है. बाकी सब सॉफ्टवेयर डायरेक्ट मार-काट पर कम ही जाते हैं.

असल लड़ाई सामाजिक सॉफ्टवेयर की है, सामाजिक वायरस की है, सामाजिक संस्कारों की है. इसे गहना समझा जाता है, कीमती गहना. असल में यही तुम्हारी बेड़ियाँ हैं, यही तुम्हारी हथकड़ियाँ हैं, यही इंसान से मशीन बना कर रखे हुए हैं तुम्हें, रोबोट. और इस रोबॉटिकरण के हेड-क्वार्टर्स हैं मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, चर्च.

जिस दिन दुनिया को यह समझ आ जायेगा, दुनिया में अधिकांश फसाद खत्म हो जाएंगे और जन्नते ढूंढने कहीं और जाना ही नहीं पड़ेगा. जन्नत यहीं होगी. असल में जन्नत तो यहाँ है ही. बस जहन्नुम बनाया जाना बंद हो जाये.

नमन!
तुषार कॉस्मिक

Tuesday, 16 July 2024

राहुल गाँधी बे-नक़ाब फिर से ....कांग्रेस का एक झूठा नैरेटिव

 
वोटिंग मशीन खराब हैं. याद है आप को कांग्रेस पार्टी समेत सब विपक्षी दल का सीढ़ी-स्यापा. भाजपा पर आरोप लगाते थे कि वोटिंग मशीन में गड़बड़ कर के जीत रही है. अब देखिये, जब से कांग्रेस की 99  सीट आई हैं, वो रौला-रप्पा , शायद ही सुना हो आप ने? क्यों? क्यों नहीं सुना? चूँकि  वो सब  कांग्रेस का एक झूठा नैरेटिव मात्र  था.  इन के ऐसे ही कई झूठे नैरेटिव  को तार-तार किया है मैंने, पूरी प्लेलिस्ट दी हैं शॉर्ट्स की कमेंट बॉक्स में, देख लीजियेगा और हां, बात जँचे रही हो तो सब्सक्राइब भी ज़रूर कर लीजियेगा

Wednesday, 10 July 2024

राहुल गाँधी की बकैती~ अभय मुद्रा पर

 



राहुल गाँधी ने सँसद में खड़े हो कर अभय-मुद्रा दिखा-दिखा कर हिँसा कर गलत अर्थ प्रस्तुत किया है. हिँसा का मुकाबला हिँसा से ही करना होता.  हिँसा के  मुकाबले में की गयी हिँसा आत्म-रक्षा है, जो बिलकुल सही है. हिँसा हमेशा गलत नहीं होती और अहिँसा हमेशा सही नहीं होती. 

Saturday, 6 July 2024

हाथरस कांड- ज़िम्मेदार कौन? UP Hathras Satsang Stampede I #hathras_case #hathrasaccident

 




ज़िम्मेदार कौन-हाथरस कांड ? UP Hathras Satsang Stampede Update: देखें बाबा की पूरी कहानी | Baba Arrest | Bhole Baba Satsang, UP Hathras Stampede Breaking News Update: उत्तर प्रदेश के हाथरस भगदड़ मामले में बाबा साकार हारि पर एक और खुलासा। खुद को भगवान बताता था बाबा। कृष्ण के रूप में प्रस्तुत करता था. हाथ में चक्र घुमाने का नाटक करता था. UP Hathras Satsang Stampede Update UP Hathras Stampede Breaking News Update: Another revelation on Baba Saakar Hari in Hathras stampede case of Uttar Pradesh. Baba used to call himself God. He used to present himself as Krishna. He used to pretend to spin a wheel in his hand. #hathrasaccident #breakingnews #hathrasstampede #Shorts #Shortsfeed #viralfeeds #Trending #trendingshorts #Viralshorts #latestnews #TusharCosmic YOUR QUERY:-- hathras satsang kand, hathras satsang kand lallantop, hathras satsang kand live, hathras satsang live hathras news live aaj tak, hathras stamped viral, Hathras Kand Kaise hua, Hathras News Live in HIndi, Hathras Ke Samachar, Hathras Hatyakand, Hathras Kand Kya hua, Hathras wake baba Playlists you may like: -- Religion: --- https://tinyurl.com/My-videos-on-Religions Sociology: -- https://tinyurl.com/My-videos-on-Sociology Politics: -- https://tinyurl.com/My-videos-on-Politics Philosophy: -- https://tinyurl.com/My-videos-on-Philosophy Osho: -- https://tinyurl.com/My-videos-on-Osho MY YOUTUBE CHANNEL: -- https://www.youtube.com/@Tushar-Cosmic DISCLAIMER: --This video is made solely with the purpose of spreading awareness and educating the viewers. The information demonstrated and explained in the video are true to the best of my knowledge and research. Nevertheless, if any error is committed, the same was never intended to be and is absolutely unintentional. In the event of any inadvertent error, kindly email us at kusu167@gmail.com for necessary action, to resolve any error/dispute amicably.

Tuesday, 2 July 2024

दुर फिट्टे मुँह~ दलजीत दोसांझ ~पहला पन्ना पलटिया ~ Dur fitte Muh #diljitdosanjh

दुर फिट्टे मुँह, पहला पन्ना पलटिया, दलजीत दोसांझ ~ Dur fitte Muh. Diljit dosanjh, latest Punjabi songs, Diljit funny vlogs, Diljit Dosanjh Funny Vlog 😅

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