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मेरा यूटूएब चैनल - तुषार कॉस्मिक. My YouTube Channel - Tushar Cosmic

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Tushar   Cosmic     यह मेरा   यूट्यूब  चैनल  है.  नया है...ऑडियंस बनते-बनते बनेगी ..... आप मित्र गण  ही बनाएंगे .... यूट्यूब अपने आप कोई ऑडियंस देता नहीं है ..... खुद से बनानी होती है...... आप मित्रगण ही बना सकते हैं...बन सकते हैं ...वीडियो देखिये.....पूरा देखिये....... मेरा वादा है सीखने को मिलेगा निश्चित ही.                        https://www.youtube.com/@Tushar-Cosmic

नैरेटिव का मुक़ाबला

आपने वो डायलॉग सुना होगा, "सरकार उनकी है तो क्या हुआ, सिस्टम तो हमारा है।" "कश्मीर फाइल्स" फिल्म में था। क्या मतलब है "सिस्टम" का? दो मतलब समझे मैने इस "सिस्टम" के. नंबर एक...इको-सिस्टम..."नैरेटिव" सेट करने का सिस्टम। मतलब लोगो तक अपने मतलब की सूचनाएँ, तर्क, संदर्भ पहुंचा दो. ज्यादा गहराई में जाने का किसी के पास समय होता नहीं, और न ही बुद्धि होती है, इसलिए बस "नैरेटिव" सेट करो और समाज में पेल दो, ढकेल दो। नंबर दूसरा, कुछ भी अपनी मर्जी का करवाना हो तो सड़क पर आ जाओ। भारत बंद करवा दो. ट्रेन रोक दो. जबरन. पूरी गुंडागर्दी.

"नैरेटिव" का असल मतलब तो पता नहीं क्या है. लेकिन मैं समझता हूँ नैरेटिव का मतलब है, "झूठ पर आधारित कोई धारणा".
जैसे "भक्त"/"अंध-भक्त"/"गोबर-भक्त/"मोदी भक्त" -- ये शब्द घड़े गए भाजपा समर्थकों के लिए. यह नैरेटिव है.
कैसे?
नूपुर शर्मा ने टीवी डिबेट में वही कहा जो इस्लामिक ग्रंथों में है, फिर भी उस को जान के लाले पड़ गए, आज भी पड़े हुए हैं, किसी ने नहीं कहा कि उसे धमकाने वाले, "सर तन से जुदा" के नारे लगाने वाले अंध-भक्त हैं. न.
कन्हैया लाल नाम के टेलर की गर्दन काट दी गयी, उसी दौर में. किसी ने नहीं कहा कि गर्दन काटने वाले भी किसी के भक्त हैं. न.
भिंडरा वाले ने गोल्डन टेम्पल में पूरा किला बना लिया, गोला बारूद भर लिया, फ़ौज खड़ी कर ली, आज भी कई लोग उसे हीरो मानते हैं, किसी ने उन लोगों को "अंध-भक्त" नहीं कहा.
ईसाई पादरियों के वीडियो आते रहते हैं, जिस में वो किसी लूले-लंगड़े को हाथ से स्पर्श से ठीक कर देते हैं और लोग नाचते फिरते हैं.. ज़रा बुद्धि लगाओ तो समझ जाओगे नौटंकी है. लेकिन कोई इन को "अंध-भक्त" नहीं बोलता.
लेकिन भाजपा का समर्थन करने वाले "भक्त" हैं, "अंध-भक्त" हैं, "मोदी भक्त" हैं, "गोबर-भक्त" हैं. इसे ही कहते हैं नैरेटिव सेट करना.
खैर, दूसरों को "अंध-भक्त" कहने वालों को मेरा इतना ही संदेश है कि पहले अपने गिरेबान झाँको। दूसरों पर पत्थर फेंकने से पहले देख लो, कहीं अपना घर शीशे का न बना हो. और पापी को पत्थर तभी मारो जब खुद कोई पाप न किया हो.
यह है नैरेटिव का मुक़ाबला. मुद्दों की गहराई में जाएँ, और इस तरह के नैरेटिव, बकवास नैरेटिव की धज्जीयां उड़ा दें चाहे, वो भाजपा की तरफ से ही क्यों न आया हो.
ऐसा ही नैरेटिव भाजपा ने भी गढ़ा। राहुल गाँधी के खिलाफ. राहुल ने कभी नहीं कहा था कि ऐसे मशीन बनाऊंगा, एक तरफ आलू, डालो, सोना निकालो. वो यह कहते हुए यह कह रहे थे कि ऐसा मोदी ने कहा है. लेकिन एडिट कर के ऐसे दिखा दिया जैसे राहुल ने ऐसा कहा है. यह था नैरेटिव. झूठा नैरेटिव भाजपा द्वारा चलाया गया.
एक और नैरेटिव आरएसएस चलाती है कि भारत ने, हिन्दुओं ने कभी किसी पर आक्रमण नहीं किया. बकवास बात है. अशोक ने कलिंग की धरती लाल कर दी थी, बिना किसी वजह के. राम और रावण दोनों शिव के भक्त थे, फिर युद्ध कैसे हो गया ? किसी ने तो किसी पर आक्रमण किया होगा न. महाभारत कैसे हो गयी? एक ही परिवार के लोग थे. किसी ने तो किसी पर आक्रमण किया न. पृथ्वीराज चौहान और जयचंद में भी तो युद्ध हुआ ही था. क्या राजे-रजवाड़े आपस में अपनी सीमाएं बढ़ाने के लिए लड़ते नहीं रहते थे? सो यह कहना कि हिन्दू बड़े शांतिप्रिय थे, एक नैरेटिव मात्र है, झूठा नैरेटिव.
सवाल भाजपा का नहीं है, न कांग्रेस का ही है, सवाल नैरेटिव का है. नैरेटिव खतरनाक हैं और इन का मुक़ाबला तर्क और फैक्ट से ही किया जा सकता है.
Tushar Cosmic

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