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Showing posts from March, 2026

इवेंट बाजी

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आप ने सुना होगा मोदी सरकार हर मौके को एक इवेंट बना देती है. इवेंट बाज हैं मोदी. वो हैं, लेकिन इवेंट बाज सिर्फ मोदी सरकार ही नहीं है, लगभग सभी हैं. अपनी-अपनी औकात के हिसाब से.  शादी क्या है? एक आदमी और एक औरत ने सेक्स की रज़ामंदी कर ली, साथ साथ रहने को राज़ी हो गए. हुआ तो बच्चे पैदा करेंगे. गुड. लेकिन इस के लिए पूरी दुनिया  को बुला कर आयोजन करने का क्या मतलब? लेकिन करेंगे. कई कई दिन करेंगे. "चाहे पल्ले नहीं धेला,  फिर भी करदी मेला-मेला". तमाम रिश्तेदारों को बुलाया जाता है. कब्र में जिनकी टाँगे हैं वो भी इत्र-फुलेल लगा कर हाजिर हो जाते हैं. कब्रों से मुर्दे भी उठा लिए जाए अगर सम्भव होता तो.  रूठों को मनाया जाता है. फूफा, जमाता जो नाराज़ हैं सदियों से सब को एक बार तो बुला ही लिया जाता है बाद चाहे फिर से नाराज़ हो जाएँ.  ड्राइवर तो रहता ही है, ड्राइवर का परिवार भी हाजिर होता  है. रोका, मँगनी, मेहँदी, हल्दी और पता नहीं क्या क्या. शादी तक पहुँचते-पहुँचते साँस फूल जाती है.  मेरी पत्नी की भतीजी की शादी थी. दो  दिन में तीन बार हुयी। पहले आर्य समाज मंदिर में. फ...

नग्नता पुराण

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पूरी कायनात नंगी है. तुम ढके रहते हो, छुपे रहते हो. लगभग हर वक्त छत्तों के नीचे रहते हो. कहते भी हैं, इंसान के सर पर छत ज़रूर होनी चाहिए। होनी चाहिए, कपड़ों में भी रहना चाहिए लेकिन हर वक्त? यह बीमारी है, यह बीमारी का एक बड़ा कारण है. तुम्हारे कपड़े, तुम्हारी छतें बीमारी का कारण हैं.  कभी तो इन्हे छोड़ो भी. कभी तो नंगे होवो, कभी तो बिना छत के रहो. गोरे  पग्गल हैं जो समद्र तटों पर नग्न पड़े रहते हैं. नहीं? कुछ समाजों में औरत लगभग सर से पैर तक ढकी रहती है ता-उम्र. इसे क्या हवा मिलेगी, क्या खुली  धूप  मिलेगी? Also read:-  Does God Exist? Review - जावेद अख़्तर और मुफ़्ती शमाइल की लल्लनटॉप डिबेट का रिव्यु कुछ समाजों में औरत को बाल तक खोलने की इजाज़त नहीं है. ईरान में क्या हुआ? सैकंड़ों औरतें  मार दी गईं सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने अपने बाल ढकने से इंकार कर दिया। क्यों? चूँकि इंसानी चेहरे पर बाल आकर्षण पैदा करते हैं. आज भी यदि कोई गंजों के सर पर बाल उगाने का फार्मूला खोज  ले तो रातों रात धन-कुबेर बन जायेगा।  Also see:-  बागेश्वर बाबा को चैलेंज क्यों है ऐसा? चूँकि...