हमास/इजराइल/जंग-असल जंग कुछ और है
मुस्लिम कहते हैं कि वो एक अल्लाह को मानते हैं बस. उसी की इबादत करते हैं. वैरी गुड. मैं पूछता हूँ उन से कि आप को कैसे पता कि कोई अल्लाह है? या फिर वो एक ही है दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं.....? आप को कैसे पता कि उस अल्लाह के आखिरी नबी /रसूल श्री मोहम्मद हैं? कोई सबूत? कोई वीडियो? कोई ऑडियो? या कोई और सबूत? या फिर बस मानते चले जाते हो? भाई, जब हर बात को इंसान सोच समझ के ही मानता है तो फिर जिन मान्यताओं पर पूरा समाज, पूरा कल्चर ही खड़ा कर दिया उन मान्यताओं का क्या आधार है, वो भी तो पूछा जाना चाहिए. और यदि इन मान्यताओं का कोई सबूत ही नहीं है तो मान लीजिये कि सारा समाज-देश-कल्चर ही बचकाना है. त्याग दीजिये. और यह मैं दुनिया के बाकी धर्मों को मानने वालों को भी कहना चाहता हूँ. मैं तमाम बहस देखता हूँ लेकिन सब गोल-गोल घूमती हैं, ऊपर-ऊपर. जड़ में कोई जाना नहीं चाहता. जड़ में जाईये. मज़हबी मान्यताओं को सवाल कीजिये. असल लड़ाई वहाँ है, असल लड़ाई बम्ब-बन्दूक-तोप की नहीं है. असल लड़ाई किताबों की हैं, विचारों की है, शब्दों की है, मान्यतों की है. असल लड़ाई लड़ो. गली-गली लड़ो, हर चौक-चौबारे लड़ो. Tushar Cosmi...