मरने और मारने वाले दोनों मुसलमान. अल्लाह-हु-अकबर.

जो लोग पाकिस्तान से आये थे, उन में मेरे पिता भी थे. 

वो "पिशोरी जुत्ती" याद करते थे, "पिशोरी लाल" नाम भी होते थे, पश्चिम पुरी, दिल्ली में आज भी "पिशोरियाँ दा ढाबा" है.


तो साहेबान, कद्रदान, मेहरबान, जिगर थाम कर आगे पढ़िए.

उसी पिशोर की मस्ज़िद में फटा बम. 70 से ज़्यादा बन्दे हलाक. 


मरने और मारने वाले दोनों मुसलमान.

अल्लाह-हु-अकबर.


~ तुषार कॉस्मिक

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