मैंने घोषणा की हैं मैं अपना गुरु खुद हूँ, मुझे किसी का हुक्मनामा नहीं चाहिए मैं अपना पैगम्बर खुद हूँ, मुझे किसी की हिदायत नहीं चाहिए मैं अपना मसीहा खुद हूँ, किसी और की कमांडमेंट की क्या ज़रुरत? मैं स्वयम ब्रह्म हूँ, मैं खुद खुदा हूँ खुद का, मुझे क्या ज़रुरत पुराण कुरान की? मैं स्वयं की रोशनी स्वयं हूँ, मुझे शताब्दियों, सहस्त्राब्दियों पुराने व्यक्तियों की आँखों से नहीं, खुद की आँखों से जीना है बड़े साधारण शब्द हैं मेरे ..लेकिन काश कि आप भी यह सब कह पाते! दुनिया चंद पलों में बदल जायेगी. इन्सान जिस जन्नत का हकदार है, वो दिनों में नसीब होगी मुल्ले, पण्डे, पुजारी, पादरी विदा हो जायेंगे मंदर, मसीत, गुरुद्वारे, गिरजे बस देखने भर की चीज़ रह जायेंगे हिन्दू मुस्लिम, इसाई आदि का ठप्पा लोग उतार फेंकेंगे सदियों की गुलामी से आज़ादी लोग आज के हिसाब से जीयेंगे..... किसी किताब से नहीं बंधेंगे किताब हो, इतिहास हो, बस उसका प्रयोग करेंगे....जो सीखना है सीखेंगे उनसे लेकिन इतिहास की गुलामी कभी स्वीकार नहीं करेंगे बहस इस बात की नहीं होगी कि मेरी किताब में यह लिखा ह...