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मेरा यूटूएब चैनल - तुषार कॉस्मिक. My YouTube Channel - Tushar Cosmic

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Tushar   Cosmic     यह मेरा   यूट्यूब  चैनल  है.  नया है...ऑडियंस बनते-बनते बनेगी ..... आप मित्र गण  ही बनाएंगे .... यूट्यूब अपने आप कोई ऑडियंस देता नहीं है ..... खुद से बनानी होती है...... आप मित्रगण ही बना सकते हैं...बन सकते हैं ...वीडियो देखिये.....पूरा देखिये....... मेरा वादा है सीखने को मिलेगा निश्चित ही.                        https://www.youtube.com/@Tushar-Cosmic

ज़ाहिर के परे

सेठ जी फोन पर व्यस्त थे........उनके केबिन में कुछ ग्राहक दाख़िल हुए लेकिन सेठ जी की बात फोन पर ज़ारी रही......लाखों के सौदे की बात थी....फिर करोड़ों तक जा पहुँची.........फोन पर ही करोड़ों की डील निबटा दी उन्होंने......ग्राहक अपनी बारी आने के इंतज़ार में उतावले भी हो रहे थे....लेकिन अंदर ही अंदर प्रभावित भी हो रहे थे........ इतने में ही एक साधारण सा दिखने वाला आदमी दाख़िल हुआ.........वो कुछ देर खड़ा रहा....फिर सेठ जी को टोका, लेकिन सेठ जी ने उसे डांट दिया, बोले, "देख नहीं रहे भाई , अभी बिजी हूँ"......वो आदमी थोड़ी देर खड़ा रहा, फिर से उसने सेठ जी को टोका, सेठ जी ने फिर से उसे डपट दिया............सेठ जी फिर व्यस्त हो गए......अब उस आदमी से रहा न गया, वो चिल्ला कर बोला , “सेठ जी, MTNL से आया हूँ, लाइनमैन हूँ, अगर आपकी बात खत्म हो गई हो तो जिस फोन  से  आप  बात कर रहे  हैं, उसका  कनेक्शन जोड़ दूं?”

आप हंस लीजिये, लेकिन यह एक बहुत ही सीरियस मामला है.

पुलिस वाले यदि किसी पैसे झड़ने वाली आसामी को पकड़ लेते हैं तो उसके सामने किसी गरीब को ख्वाह-म-खाह कूटते-पीटते रहते हैं......वो कहते हैं न,  बेटी को कहना और बहू को सुनाना ....कुछ कुछ वैसा ही.

अक्सर लोग अपनी धाक दिखाने को 'फ्री होल्ड गालियाँ' देते हैं, मैं इन्हें 'थर्ड पार्टी गालियाँ' भी कहता हूँ. बातचीत में बिना मतलब  "माँ....की..... बहन की" करते   रहेंगे .........ख्वाह-म-खाह .....सिर्फ अपनी दीदा दलेरी दिखाने को

वकील लोग चाहे केस का मुंह सर न समझ रहे हों, लेकिन प्रभावित करते हैं कभी न पढ़े जाने वाली अलमारियों में सजाई गई किताबों से....... अपने इर्द गिर्द पांच सात नौसीखिए वकीलों से......फ़ोन, कंप्यूटर, चलते प्रिंटर से ........इम्प्रैशन टूल.

आपको यह सब क्यों बता रहा हूँ? बस एक ही बात समझाना......Looking beyond the obvious.....जो ज़ाहिर है, उसके पार देखने की कोशिश करें...ज़रूरी नहीं उसके परे कुछ हो ही...नहीं भी हो...लेकिन शायद हो भी

अंग्रेज़ी में कहते हैं, "Reading between the lines". लाइनों  के बीच पढ़ना, शब्दों के छुपे मंतव्य समझना. 

नमन....कॉपी राईट

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