देशद्रोही--- सर जी, अगर कोई हो तो अपनी पार्टी की ख़ासियत बताएं. भक्त----- अबे, हमारी पार्टी इकलौती पार्टी है, जो पाक-साफ़ है. यू क्नो, “पार्टी-विद-ए-डिफरेंस”. देशद्रोही--- सर जी, सच में क्या? भक्त---- और नहीं तो क्या? हम कोई आम-आदमी-पार्टी के नेताओं जैसे थोड़ा न है, जो रोज़ पकड़े जाते हैं. देशद्रोही--- लेकिन सर जी, वो तो ज्यादातर तो ऐसे केस हैं जो पोकेट-मार पर भी न बने. और उनमें से ज्यादातर तो कोर्ट ने रद्द दिए हैं. भक्त- अबे, तू मूर्ख है, तुझे समझ नहीं आएगी. सिर्फ हमारी पार्टी ही इमानदार है. देशद्रोही- सर जी, लेकिन आपकी पार्टी के प्रमुख बंगारू लक्ष्मण तो सरे-आम रिश्वत लेते हुए पकडे गए थे. भक्त- हाँ बे, लेकिन वो इक्का-दुक्का केस था. देशद्रोही---- सर जी, लेकिन वो पार्टी प्रमुख थे. और फिर आपकी ही पार्टी के बड़े नेता राघव जी अपने नौकर के साथ सेक्स सम्बन्धों में पकड़े गए थे. भक्त- अबे! उसे पार्टी से निकाल तो दिया गया था. देशद्रोही--- सर जी, वो तो केजरीवाल भी कर रह है. भक्त- फिर भी हमारी पार्टी ही “पार्टी-विद-ए-डिफरेंस” है. ये इक्का-दुक्का केस है. देशद्रोही--- लेकिन सर ज...
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भक्त----- मोदी, मोदी, मोदी. हर हर मोदी, घर घर मोदी. देशद्रोही--- लेकिन सर जी, वो उमा भारती तो कहती हैं कि मोदी सिर्फ मीडिया द्वारा भरा गया गुब्बारा हैं. भक्त---- अबे वो विरोधिओं की चाल है सब. देशद्रोही--- लेकिन सर जी, उमा जी तो भाजपा से ही सम्बन्धित हैं. और वो रामजेठमलानी भी कहते हैं कि मोदी ने उनको उल्लू बनाया है. भक्त-- अबे वो भी विरोधिओं की चाल है. देशद्रोही-- सर जी, लेकिन वो भी तो आपकी पार्टी से ही सम्बन्धित रहे हैं. और सर जी, वो शत्रुघ्न सिन्हा भी नोट-बैन पर कुछ सवाल उठा रहे हैं. भक्त--- हाँ बे, वो भी विरोधिओं की चाल है. देशद्रोही--- लेकिन वो भी तो आपकी पार्टी से ही सम्बन्धित हैं.और सर जी,वो मीनाक्षी लेखी ने भी पीछे कहा था कि नोट-बंदी बहुत गलत कदम होगा. भक्त--- हाँ बे, वो भी विरोधिओं की चाल है. देशद्रोही---- सर जी, लेकिन वो भी तो आपकी ही पार्टी से हैं. और वो राज ठाकरे भी कहते हैं कि मोदी जी सरकारी पैसे से अपनी पार्टी की रैली करते हैं. रैली के लिए जिस हेलीकाप्टर में उड़ते हैं वो भी सरकारे पैसे से उड़ता है. न सिर्फ वो बल्कि 25 हेलीकाप्टर तब तक हवा में उड़ते हैं, जब...
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देशद्रोही--- सर जी, सुना है, अमित शाह बीजेपी नेताओं के बैंक अकाउंट चेक करेंगे. भक्त----- मैं न कहता था शुरू से हमारी पार्टी सबसे ईमानदार है. देशद्रोही--- लेकिन सर जी, फिर थे शायद आज़ादी से लेकर आज तक का सारा हिसाब राष्ट्र के आगे रख देंगे भाजपा नेताओं का. मल्ल्ब रोडपति से कैसे करोड़पति बने ज़रा ‘आम अमरुद आदमी’ को भी इतना जल्ली अमीर होने का नुस्खा मिल जाएगा. नहीं? भक्त---- अबे क्या बकैती करता है, वो तो बस नोट-बंदी के दौर की ही चेकिंग होनी है. देशद्रोही--- हम्म्म्म.......तो सर जी, भाजपा अपनी पार्टी का अकाउंट तो ज़ाहिर कर ही देगी कि उनके पास कितना पैसा आया, किस से आया? खास करके मोदी जी के चुनाव का खर्च किसने वहन किया वो तो पता लगा ही जाएगा. नहीं? भक्त- अबे, चोप. वो तो बस नोट-बंदी के दौर की ही चेकिंग होनी है. देशद्रोही--- चलिए सर जी, इतना भर तो बता ही देंगे अमित शाह कि जो 1100 करोड़ रुपये मोदी जी के कार्य-काल में advertisement पर खर्च किये हुए हैं, उनमें से कुछ भी पैसा उनकी पार्टी प्रचार में नहीं गया. नहीं? भक्त—अबे चोप, देशद्रोही!
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देशद्रोही--- सर जी, मोदीजी के कार्यकाल की कोई उपलब्धि और बताएं. भक्त----- मोदी जी ने “मेक इन इंडिया” चलाया. देशद्रोही--- लेकिन सर जी, सुना है वो ‘मेक इन इंडिया’ का शेर भी इंडिया से बाहर की कम्पनी ने बनाया है. भक्त- उससे क्या होता है? तुम उनकी योजना का मतलब समझो. देशद्रोही-----सर जी, लेकिन “मेड इन इंडिया” क्यूँ नहीं? या “मेड इन इंडिया बाय इंडियन” क्यूँ नहीं? मतलब हम भारतीयों के हाथ पैर, दिमाग कुछ कम है कि हमारे मुल्क में हम आमंत्रित करें दुनिया भर को कि आओ और यहाँ आकर उद्योग लगाओ. मतलब मोदी जी ने यह पहले से ही कैसे मान लिया कि हम खुद कुछ नहीं बना सकते? भक्त---- अरे वो बाहर से टेक्नोलॉजी आयेगी, बाहर के तकनीशियन आयेंगे, बाहर की पूंजी आयेगी तो यहाँ रोज़गार पैदा होगा. देशद्रोही--- मतलब न हम तकनीक पैदा कर सकते हैं, न सीख सकते हैं, न पूंजी पैदा कर सकते हैं. और न ढंग का रोज़गार. हम सिर्फ लेबर टाइप काम ही कर सकते हैं. यही न? भक्त- अरे भाई, हमारे पास अपार युवा शक्ति है, इसे रोज़गार भी तो देना है कि नहीं. देशद्रोही--- सर जी, उसके लिए “मेक-इन-इंडिया” क्यों? मेड-इन-इंडिया क्यों नहीं...
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देशद्रोही--- सर जी, कभी आपने देखा है कि कोई मर जाए और फिर से जिंदा हो जाए. भक्त------ पागल हुए हो, ऐसा कभी होता है? देशद्रोही-- होता है, होता है. आठ तारीख को हमारे मुल्क के हज़ार और पांच सौ के नोट मर गए थे और बीस दिन बाद पता लगा कि इनमें जान है अभी. आधी ही सही. भक्त---- अबे चोप! कहाँ की कहाँ जोड़ता है. देशद्रोही---सर जी, एक कहावत का मतलब ही बता दीजिए? भक्त—---कौन सी? देशद्रोही-- थूक कर चाटना? भक्त—---अबे चोप्प! देशद्रोही!!
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देशद्रोही--- सर जी, सुना है सुप्रीम कोर्ट से बहुत खुश हैं आप कि सिनेमा में फिल्म चलने से पहले अब राष्ट्र गान चलना अनिवार्य कर दिया उनने. भक्त---- खुश तो होने की बात ही है, अब तो सुप्रीम कोर्ट भी राष्ट्र-वादी होती जा रही है? देशद्रोही------ लेकिन सर जी, आप तो राष्ट्र-गान का विरोध नहीं करते थे कि रोबिन्द्र नाथ टैगोर ने यह जार्ज पंचम के स्वागत में लिखा था न कि भारत की शान में. भक्त- जो भी हो अपना सुप्रीम कोर्ट है बढ़िया. देशद्रोही--- सर जी, अभी चार दिन पहले ही तो आप कोर्ट को गरिआते फिर रहे थे जब उसने नोट-बंदी पर आपकी सरकार को हिदायत दी थी कि पब्लिक का ध्यान रखो वरना दंगे भड़क सकते हैं. भक्त—अबे चोप्प! देशद्रोही!!
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भक्त---- इनकम टैक्स का साल भर बाद हिस्साब देने में जब इतनी परेशानी है तो सोचो मारने के बाद भगवान को हिसाब देने में कितनी दिक्कत होगी. देशद्रोही------ सर जी, सीधा कहो न कि सरकार को भगवान मान लिया जाए. भक्त—वैसे ऐसा है तो नहीं लेकिन तुम चाहो तो ऐसा ही मान लो. देशद्रोही--- तो सर जी अपुन तो नास्तिक हैं. भक्त—अबे चोप्प! देशद्रोही!!
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देशद्रोही—सुना है सर जी आप सुप्रीम कोर्ट से बहुत खुश हैं कि राष्ट्र-गान सिनेमा में फिल्म चलने से पहले अनिवार्य कर दिया है उनने? भक्त- बिलकुल. बात ही खुशी की है. अपने राष्ट्र की जय का गान है यह. देशद्रोही- और सुना है सर जी आप पाकिस्तान के ऊपर जो कथित सर्जिकल स्ट्राइक की है उससे भी बहुत खुश हैं. सही है क्या? भक्त--- पाकिस्तान की ईंट से ईंट बजा देनी चाहिए. देशद्रोही---- सर जी, जिस राष्ट्र-गान को आप अपने राष्ट्र की जय का गान बता रहे हैं उसी में गाया जाता है, “जनगणमन-अधिनायक जय हे भारतभाग्यविधाता! पंजाब ‘सिन्धु’ गुजरात मराठा द्राविड़ उत्कल बंग विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छलजलधितरंग तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मागे, गाहे तव जयगाथा। जनगणमंगलदायक जय हे भारतभाग्यविधाता! जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।।” सर जी, इस गान में तो “सिन्धु” भी और सिन्धु प्रदेश तो अब पाकिस्तान में है तो निश्चित ही हमारा राष्ट्र गान सही नहीं है और जब सही नहीं तो फिर आपकी खुशी भी सही नहीं. नहीं? भक्त—अबे चोप्प! देशद्रोही!!
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देशद्रोही--- सर जी, आप तो घोर राष्ट्रवादी हैं. नहीं? भक्त---- हैं. कोई शक? घोर ही नहीं घनघोर हैं. देशद्रोही------ सर जी, आप तो भारतभूमि को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हैं, नहीं? भक्त— बिलकुल भारत ही विश्व-गुरु था और विश्व-गुरु बनेगा. देशद्रोही--- सर जी आप तो “वसुधैव कुटुम्बकम” की धारणा में भी विश्वास करते हैं. नहीं?. भक्त— बिलकुल, यह महान विचार भी अपने ही राष्ट्र की देन है. देशद्रोही--- सर जी आप तो “विश्व बंधुत्व” की धारणा में भी विश्वास करते होंगे. नहीं? भक्त— बिलकुल, यह महान विचार भी अपने ही राष्ट्र की देन है. देशद्रोही-- सर जी, अगर सच में ही आप “वसुधैव कुटुम्बकम” और “विश्व बंधुत्व” में यकीन करते हैं तो आप की यह जिद्द नहीं होती कि भारत ही सर्वश्रेष्ठ है. यह घमण्ड नहीं तो और क्या है? भक्त—अबे चोप्प! देशद्रोही--- कुटुम्ब तो कुटुम्ब है न सर जी, कोई एक ही व्यक्ति महान हो, बाकी हीन हों तो यह कैसा कुटुम्ब होगा? एक ही व्यक्ति गुरु रहे हमेशा, यह कैसा कुटुम्ब होगा? किसी बंधुत्व में एक ही व्यक्ति महान हो, एक ही व्यक्ति विशेष रहे, एक ही व्यक्ति गुर रहे, यह कैसा बंधुत्व होगा?...
‘यन्त्रणा’
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‘यन्त्रणा’. यह शब्द बहुत गहरा है. इसका शाब्दिक अर्थ है कष्ट , भयंकर कष्ट. लेकिन गहन अर्थ है यंत्र की भांति जीना. जैसे ही हम स्व-चैतन्य खो कर यंत्र हो जाते हैं, प्रोग्राम्ड हो जाते हैं तो जीवन यन्त्रणा हो जाता. इसकी पुलक खो हो जाती है. इसका असल खो जाता है. बहुत पहले "लैंडमार्क फोरम" नाम से वर्कशॉप अटेंड की थी. उसका निचोड़ यह था कि हम सब मशीन हैं, यंत्र हैं. उसका मतलब था कि हम सब का जीवन यन्त्रणा मात्र है.थोड़ा ध्यान से देखें, हम सब को समाज ने बचपन से ही यंत्र में त ब्दील करने में कोई कसर नहीं छोडी. हमारे सब विचार किसी और के हैं. बस किसी और की फीडिंग. और हम समझ रहे हैं कि हम विचारशील है. यह ऐसे ही है जैसे एक रोबोट जिसका रिमोट किसी और के हाथ में हो, लेकिन वो गाता रहे, "मैं खुद-मुख्तार हूँ, मैं खुद-मुख्तार हूँ", जबकि उसे कभी पता ही न लगे कि यह जो वो गा रहा है कि वो खुद-मुख्तार है, वो भी बस फीडिंग है. वो गाना भी रिमोट-कण्ट्रोल से उससे गवाया जा रहा है. जब तक इस फीडिंग को नहीं तोडेंगे, जब तक इस यांत्रिकता से बाहर नहीं आयेंगे जीवन यन्त्रणा ही रहेगा.
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देशद्रोही--- सर जी, आरएसएस मतलब संघ में ध्वज को ही गुरु माना गया है, सच है क्या? भक्त---- बिलकुल, हम भगवा ध्वज को ही नमन करते हैं. हमारे यहाँ व्यक्ति नहीं, विचार की पूजा होती है. देशद्रोही------ बढ़िया बात है सर जी, फिर ये मोदी मोदी चिल्लाने वाले लोग तो देश द्रोही होंगे न? मूर्ख व्यक्ति-पूजक! भक्त- अबे चोप्प! देशद्रोही!!
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"कुछ दिन पहले" देशद्रोही--- सर जी, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को हिदायत दी है कि नोट-बंदी की वजह से लोगों को ज़्यादा परेशानी न हो इसका ख्याल रखा जाए, कहीं दंगे ही न भड़क जाएं. भक्त--- चोर हैं खुद. देशद्रोही कहीं के. "कुछ दिन बाद" देशद्रोही-- सर जी, सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म से पहले सिनेमा हाल में राष्ट्र-गान अनिवार्य कर दिया है. भक्त—बढ़िया. बधाई हो, सुप्रीम कोर्ट भी राष्ट्र- वादी बनती जा रही है. "आज" देशद्रोही-- सर जी, सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्रवाई से पहले राष्ट्र-गान अनिवार्य किये जाने वाली याचिका को नकार दिया है और केंद्र सरकार से पूछा है कि नोट- बंदी की वजह से लोगों को हो रही मुश्किलें दूर करने के लिए क्या किया? भक्त- अबे चोप्प! देश द्रोही!!
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भक्त--- हम राष्ट्रवादी हैं और हमसे बड़ा देश-भक्त न कोई हुआ है और न होगा. देशद्रोही-- है सर जी है, और एक नहीं कई हैं. मैं अब्बी का अब्बी साबित कर सकता हूँ. भक्त ---- कर. और अगर न किया तो तेरी टाँगे तोड़ दूंगा. देशद्रोही-- राज ठाकरे....उद्धव ठाकरे..........और......... भक्त---अबे पॉइंट पर आ न, इनके नाम लेने से क्या होगा? देशद्रोही---- ये आप सबसे बड़े राष्ट्र-वादी हैं? भक्त---- कैसे? देशद्रोही ---- चूँकि ये महाराष्ट्र-वादी हैं. भक्त---- अबे चोप्प! देशद्रोही!!