करो विश्लेषण इस पे वड्डे विश्लेषको

बारीक चुनावी  विश्लेषण यह किया जा रहा है कि सरकार किस की बनेगा, कैसे बनेगी. 

मूढ़ लोग. काश इस से आधा विश्लेषण इन पॉइंट पे किया जाता कि इन चुनावों का औचित्य क्या है? 

क्या इस तरह के चुनाव सच में आम इंसान का प्रतिनिधित्व करते हैं या फिर "पैसा फेंक तमाशा देख" वाला खेला ही हो रहा है.

क्या ये चुनाव असल जनतन्त्र देते हैं? क्या एक आम नाई, धोबी, मोची, प्लम्बर मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री बन सकता है? 

असल बात है कि म्युनिसिपेलिटी के चुनाव भी करोड़ोंपति लोग ही लड़ते हैं. 

क्यों? 

करो विश्लेषण इस पे वड्डे विश्लेषको.

~ तुषार कॉस्मिक

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