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मेरा यूटूएब चैनल - तुषार कॉस्मिक. My YouTube Channel - Tushar Cosmic

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Tushar   Cosmic     यह मेरा   यूट्यूब  चैनल  है.  नया है...ऑडियंस बनते-बनते बनेगी ..... आप मित्र गण  ही बनाएंगे .... यूट्यूब अपने आप कोई ऑडियंस देता नहीं है ..... खुद से बनानी होती है...... आप मित्रगण ही बना सकते हैं...बन सकते हैं ...वीडियो देखिये.....पूरा देखिये....... मेरा वादा है सीखने को मिलेगा निश्चित ही.                        https://www.youtube.com/@Tushar-Cosmic

सावधान हो जायें! यह लोकतंत्र, असल लोकतंत्र की हत्या है.

यदि तुम को लड्डू जलेबी में से ही बेस्ट चुनना हो तो तुम्हें कैसे पता चलेगा कि काजू कतली भी खाई जा सकती है, बादाम बर्फी भी खाई जा सकती है, नारियल बर्फी भी होती है?


वैसे ही तुम्हारा लोकतंत्र है. तुम्हें जो परोसा जाता है, उस में से चुनना है तुम को... तुम्हारे तक काजू कतली, बादाम बर्फी, नारियल बर्फ़ी जैसे इंसान पहुंचने ही नहीं दिए जाते. तुम तक तो लड्डू जलेबी जैसे इन्सान भी नहीं पहुँचने दिए जाते. तुम तक पहुँचता है कूड़ा.

तुम तक अथाह धन, कॉर्पोरेट धन से ब्रांडेड नेता पहुंचाए जाते हैं.....वो नेता तुम्हें अपनी उपलब्धियां बताता है लेकिन असल में और क्या क्या हो सकता था जो उस ने नहीं किया, वो कौन बतायेगा? वो जब तुम्हें समझ आयेगा तो तुम्हें पता लगेगा कि तुम्हारे नेता तुम्हारा भविष्य और तुम्हारा वर्तमान खाए जा रहे हैं. तब तुम्हें पता लगेगा कि तुम जनतंत्र हो ही नहीं. तब तुम्हें पता लगेगा कि प्लेटो और एरिस्टोटल का सोचा गया जनतंत्र , जिसे जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए ही होना चाहिए था, वो सिर्फ़ एक भ्रम है.

सरकारें पूरा जोर लगाती हैं कि आप वोट दें. क्यों दें? थोड़ा सा भी समझदार इन्सान समझता है, इस गोरख-धंधे को. उसे पता है सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं. सत्ता में कोई आये, कोई जाए, कोई लम्बा-चौड़ा फर्क नहीं पड़ता. उसे पता है यह लोकतंत्र है ही नहीं. यह सब एक ड्रामा है, नौटंकी जो हर 5 साल बाद होती है. सो वो तटस्थ पड़ा रहता है. उस का वोट न देना सबूत है इस बात कि वो पूरे सिस्टम के खिलाफ वोट दे रहा है. मूक वोट......उसे पता है कि उसे बढ़िया व्यक्तियों में से बेहतरीन को चुनने का विकल्प नहीं दिया जा रहा बल्कि घटिया लोगों में से कम घटिया को चुनने का विकल्प दिया जा रहा है. उसे पता है उसे Good
व्यक्तियों में से Best नहीं चुनना है बल्कि उसे Worst लोगों में से Bad चुनना है. वो इस विकल्प को ही त्याग देता है. वोट देना ही क्यों? वो वोट देने ही नहीं जाता. लेकिन सरकारें प्रोत्साहित करती हैं वोट डालने को...जैसे कोई बड़ा महान काम किया जाना हो. कद्दू में तीर. मात्र इसलिए कि आप सब इस नकली जनतंत्र का हिस्सा बने रहें. कहीं आप को ख्याल ही न आ जाये कि यह सब क्या बकवास है. कहीं वोट न देने वाले वोट देने वालों से बहुत बहुत कम न हो जाएँ. ऐसे में वोटिंग का क्या मतलब रह जायेगा? कहीं कोई इस छद्म जनतंत्र के खिलाफ ही न खड़े हो जायें. सो यह ड्रामा, नौटंकी चलती रहे, इसलिए खूब प्रचारित किया जाता है कि आप वोटर कार्ड बनवाएं, आप वोट दें.

सावधान हो जायें! यह लोकतंत्र, असल लोकतंत्र की हत्या है. और हत्यारे हैं आप के नेता. ब्रांडेड नेता. कॉर्पोरेट मनी के दम से बने नेता. अथाह धन, अनाप-शनाप धन, अँधा-धुन्ध धन से बने नेता.....

इसे समझें और इसे खत्म करें. असल लोकतंत्र की तरफ बढें. असल लोकतंत्र तब होगा जब तुम्हारी गली का मोची भी चुनाव जीत सके यदि काबिल हो तो. यह तभी होगा जब राजनीति में व्यक्तिगत प्रचार पर पूरी तरह पाबंदी लगेगी, जब प्रचार सरकार करेगी. सब प्रत्याशियों का बराबर.

और जब प्रत्याशी अपना-अपना नेशन बिल्डिंग प्लान पेश करेंगे. और जनता प्लान को वोट देगी न कि प्लान देने वाले को. यदि प्लान देने वाला प्लान को ठीक से नहीं चलाता तो उसे हटा दिया जायेगा. दूसरे किसी को मौका दिया जायेगा लेकिन प्लान वही रहेगा. यह ठीक ऐसे ही है जैसे आप बिल्डिंग बनवाते हैं. नक्शा पास हो गया, अब ठेके दार काम कर रहा है लेकिन यदि ठीक काम नहीं करता तो ठेके दार बदल दिया जाता है. सिम्पल.

एक दम राजनीति बदल जाएगी. देश बदल जायेगा. दुनिया बदल जाएगी और स्वर्ग से सुकरात, अरस्तु और अफ़लातून मुस्करा रहे होंगें.

नमन..तुषार कॉस्मिक

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