कहो दिल से, कांग्रेस फिर से--BULLSHIT दिमाग मत लगाना, दिमाग लगयोगे तो IPP में शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखेगा... राजनीतिज्ञ होशियार है, वो दिल की बात करता है, दिमाग की नहीं.... वो कहता है यह मुफ्त दूंगा, यह करूंगा, वह करूंगा....कैसे दूंगा, किसकी जेब काटूँगा, कैसे विकास करूंगा, प्रोसेस नहीं समझाएगा..... असल बात यह कि राजनीतिज्ञ की वजह से तरक्की होती नहीं, बल्कि रूकती है, पब्लिक तक देर से पहुँचती है, आधी अधूरी पहुँचती है और नहीं भी पहुँचती.... यह दिल, विल की बात बकवास है, पब्लिक को दिमाग लगाना चाहिए लेकिन आप खुश हो सकते हैं कि आपके धर्म का, तबके का व्यक्ति पॉवर में आये....आप वोट मज़हब, बिरादरी, समाज की वजह से देते हैं सब दिल की बातें हैं, कुछ बेहतरी न होगी दिमाग लगायें IPP का एजेंडा पढ़ें, यह पूरा प्रोग्राम है , पूरा प्रोसेस है कि भारत का विकास कैसे किया जा सकता है, और यह एजेंडा कोई वोट लेने को नहीं लिखा गया, यह कड़वी गोली है बीमार यदि डॉक्टर से मीठी गोली मांगे, अपनी ही पसंद की दवा खाने की जिद पर अड़ा रहे तो शायद ही ठीक हो, और जो डॉक्टर दवा मरीज़ की डिमांड के अनुरूप दे वो शायद ही ...