हम सब इवेंट बाज हैं आप ने सुना होगा मोदी सरकार हर मौके को एक इवेंट बना देती है. इवेंट बाज हैं मोदी. वो हैं, लेकिन इवेंट बाज सिर्फ मोदी सरकार ही नहीं है, लगभग सभी हैं. अपनी-अपनी औकात के हिसाब से. शादी क्या है? एक आदमी और एक औरत ने सेक्स की रज़ामंदी कर ली, साथ-साथ रहने को राज़ी हो गए. हुआ तो बच्चे पैदा करेंगे. गुड. लेकिन इस के लिए पूरी दुनिया को बुला कर आयोजन करने का क्या मतलब? लेकिन करेंगे. कई-कई दिन करेंगे. "चाहे पल्ले नहीं धेला, फिर भी करदी मेला-मेला". तमाम रिश्तेदारों को बुलाया जाता है. रूठों को मनाया जाता है. फूफा, जमाता जो सदियों से नाराज़ हैं सब को एक बार तो बुला ही लिया जाता है बाद में चाहे फिर से नाराज़ हो जाएँ. ड्राइवर तो रहता ही है, ड्राइवर का परिवार भी हाजिर होता है. कब्र में जिनकी टाँगे हैं वो भी इत्र-फुलेल लगा कर हाजिर हो जाते हैं. कब्रों से मुर्दे भी उठा लिए जाए अगर सम्भव होता तो. रोका, मँगनी, मेहँदी, हल्दी और पता नहीं क्या-क्या. शादी तक पहुँचते-पहुँचते साँस फूल जाती है. मेरी ...